(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा?
(2) “जीवन में उतार चढ़ाव तो होता ही है।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए?
(3) बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए?
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिएऔर कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
(1) गंडा बाँधने की परंपरा में बदलाव का कारण
मैंने यह कारण इसलिए चुना क्योंकि मुझे लगा कि बरजू महाराज शिष्य की सच्ची मेहनत और लगन को देखना चाहते थे। वे चाहते थे कि पहले शिष्य खुद को सिद्ध करे, तभी गुरु उसका मार्गदर्शन करें। यह बात मुझे सही और समझदारी भरी लगी।
(2) जीवन में आए उतार-चढ़ाव का कारण
मैंने यह कारण इसलिए चुना क्योंकि पाठ में बताया गया कि उनके जीवन में बहुत संघर्ष था। उनके पिताजी के जाने के बाद आर्थिक कठिनाइयाँ आईं और फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। यह बात मुझे बहुत प्रेरणादायक लगी।
(3) बच्चों को लय के साथ खेलने की सलाह का कारण
मैंने यह कारण इसलिए चुना क्योंकि इससे बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं-जैसे अनुशासन, तालमेल और ध्यान लगाना। यह खेल की तरह होता है लेकिन इससे दिमाग भी तेज़ होता है। मुझे यह बहुत अच्छा विचार लगा।
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही संदर्भों या अवधारणाओं से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:-
| 1. कर्नाटक संगीत शैली | 2. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है। इसमें स्वर शैली की प्रधानता होती है। जल तरंगम, वीणा, मृदंग, मंडोलिन वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। |
| 2. घराना | 4. हिंदुस्तानी संगीत में कलाकारों का एक समुदाय या कुटुंब, जो संगीत नृत्य की विशिष्ट शैली साझा करते हैं। संगीत या नृत्य की परंपरा, जिसमें सिद्धांत और शैली पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण के द्वारा आगे बढ़ती है। |
| 3. शास्त्रीय संगीत | 1. भारत की प्राचीन गायन-वादन गीत-नृत्य अभिनय परंपरा का अभिन्न अंग है। इसमें शब्दों की अपेक्षा सुरों का महत्व होता है। इसमें नियमों की प्रधानता होती है। |
| 4. हिंदुस्तानी संगीत शैली | 6. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है। तबला, सारंगी, सितार, संतूर वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। इसके प्रमुख रागों की संख्या छह है। |
| 5. कनछेदन | 3. हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक है, यह कान में सोने या चाँदी का तार पहनाने से संबंधित है। |
| 6. लोक नृत्य | 5. किसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य। लोक नृत्य, क्षेत्र विशेष की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं। ये विशेष रूप से फसल कटाई, उत्सवों आदि के अवसर पर किए जाते हैं। |
इस पाठ का शीर्षक ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? लिखिए।
उत्तर:-
नया शीर्षक:
“लय और कला: बिरजू महाराज की प्रेरणादायक यात्रा”
कारण:
यह शीर्षक इसलिए चुना गया क्योंकि साक्षात्कार में बिरजू महाराज कथक नृत्य में लय (रिदम) और कला के महत्व पर जोर देते हैं, साथ ही अपने जीवन के संघर्षों और उपलब्धियों को साझा करते हैं। “लय और कला” उनके नृत्य के मूल तत्वों को दर्शाता है, जबकि “प्रेरणादायक यात्रा” उनके कठिन परिश्रम, समर्पण, और कला के प्रति दृष्टिकोण को उजागर करता है। यह शीर्षक पाठ के प्रेरणादायक और कलात्मक स्वरूप को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है, जो पाठकों को उनकी कहानी और कथक की गहराई से जोड़ता है।
1. साक्षात्कार को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(क) बिरजू महाराज नृत्य का औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ होने से पहले ही कथक कैसे सीख गए थे?
उत्तर:- बिरजू महाराज ने अपने पिता अच्छन महाराज और चाचाओं, शंभु महाराज और लच्छू महाराज, को नृत्य करते देखकर और उनके साथ समय बिताकर कथक सीखा। घर में नृत्य और संगीत का माहौल होने से उन्होंने स्वाभाविक रूप से कथक की बारीकियाँ ग्रहण कीं।
(ख) नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:- बिरजू महाराज के अनुसार, नृत्य और संगीत एक-दूसरे से जुड़े हैं। संगीत की समझ नृत्य को समृद्ध बनाती है क्योंकि नृत्य में लय और ताल का महत्व होता है। गायन और वाद्ययंत्रों की जानकारी से नर्तक की प्रस्तुति प्रभावशाली होती है।
(ग) नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को और किन-किन कार्यों में रुचि थी?
उत्तर:- बिरजू महाराज को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में गायन, तबला और ढोलक बजाना, कविता लेखन (ब्रजश्याम के नाम से), और चित्रकला में रुचि थी। वे संवेदनशील कवि और वक्ता भी थे।
(घ) बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से क्या कहा है?
उत्तर:- बिरजू महाराज ने कहा कि यदि बच्चों में रुचि हो तो उन्हें लय के साथ खेलने और जीवन जीने की अनुमति देनी चाहिए। नृत्य और संगीत जैसे कला के खेल बौद्धिक विकास, संतुलन, समय का सदुपयोग और अनुशासन सिखाते हैं। बच्चों को प्रकृति का अवलोकन करने की सलाह दी।
2.पाठ में से उन प्रसंगों की पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि-
(क) बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
उत्तर:- बिरजू महाराज की बहुमुखी प्रतिभा निम्नलिखित से स्पष्ट होती है:
(ख) बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा।
उत्तर:- बिरजू महाराज की माँ का योगदान निम्नलिखित से स्पष्ट होता है:
(ग) बिरजू महाराज महिलाओं के लिए समानता के पक्षधर थे।
उत्तर:- बिरजू महाराज के समानता के समर्थन को निम्नलिखित से समझा जा सकता है:
(ख) नीचे दो तबले हैं, एक में कुछ शब्दांश (उपसर्ग व प्रत्यय) हैं, दूसरे तबले में मूल शब्द हैं। इनकी सहायता
से नए शब्द बनाइए –
उत्तर:-
| आ | मर्म | आमर्म |
| अ | मर्म | अमर्म |
| ईय | राष्ट्र | राष्ट्रीय |
| सु | श्रम | सुश्रम |
| इक | संस्कृति | सांस्कृतिक |
| आ | कर्म | आकर्म |
| ता | नाम | नामता |
| इत | गमन | गमित |
| सु | खंड | सुखंड |
| अ | साधारण | असाधारण |
(ग) इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए।
उत्तर: शब्द और वाक्य
1. आवरण (उपसर्ग: आ + वरण)
2.अद्भुत (उपसर्ग: अ + द्भुत)
3.प्रस्तुति (उपसर्ग: प्र + स्तुति)
4.निपुणता (प्रत्यय: निपुण + ता)
5.सांस्कृतिक (प्रत्यय: संस्कृति + इक)
6.प्रेरणा (उपसर्ग: प्र + ईरणा)
7.सामर्थ्य (प्रत्यय: समर्थ + य)
8. प्रसिद्ध (उपसर्ग: प्र + सिद्ध)
क) बिरजू महाराज – “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा है। हाँ, उसके प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए हैं।” इस कथन को ध्यान में रखते हुए लिखिए कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं?
उत्तर: बिरजू महाराज ने कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए इसके प्रस्तुतीकरण में निम्नलिखित बदलाव किए:
(ख)लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है? लिखिए। (इस प्रश्न के उत्तर के लिए आप अपने सहपाठियों, अभिभावकों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)
उत्तर: लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में निम्नलिखित अंतर हैं:
(ग) “बैरगिया नाला जुलुम जोर, नौ कथिक नचावें तीन चोर। जब तबला बोले धीन-धीन, तब एक-एक पर तीन-तीन।” इस पाठ में हरिया गाँव में गाए जाने वाले उपर्युक्त पद का उल्लेख है। आप अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले किसी लोकगीत को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: लोकगीत: “छोटी-छोटी गइया, छोटे-छोटे ग्वाल” (उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश का लोकगीत, कृष्ण भक्ति से प्रेरित) गीत की पंक्तियाँ: छोटी-छोटी गइया, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटी-सी मथुरा, छोटा-सा रसाल। कान्हा मुरली बजावे, गइया नाचें थिरक-थिरक, गोपियाँ ताली बजावें, धुन में मगन सखी।
प्रस्तुति का तरीका:
(क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
उत्तर: साक्षात्कार से पहले निम्नलिखित तैयारियाँ की गई होंगी:
(ख) आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे?
उत्तर: मैं निम्नलिखित प्रश्न जोड़ना चाहूँगा:
ये प्रश्न बिरजू महाराज के वैश्विक प्रभाव, समकालीन प्रासंगिकता, और व्यक्तिगत अनुभवों को और गहराई से जानने में मदद करेंगे।
(ग) यह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है। यदि आपको किसी सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक या सहायिका का साक्षात्कार लेना हो तो आपके प्रश्न किस प्रकार के होंगे?
उत्तर: सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, या घरेलू सहायक के साक्षात्कार के लिए प्रश्न उनके दैनिक जीवन, चुनौतियों, और व्यक्तिगत अनुभवों पर केंद्रित होंगे। उदाहरण:
ये प्रश्न उनके जीवन, संघर्षों, और आकांक्षाओं को समझने पर केंद्रित हैं, जो उनके पेशे की साधारणता को प्रेरणादायक बनाते हैं।
उत्तर:-
रूपक
लक्ष्मी
दादरा
झूमरा
तिलवाड़ा
दीपचंदी
कहरवा
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