(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए।बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. “बसों मेरे नैन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
विश्लेषण: कविता की पंक्ति “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” से स्पष्ट है कि मीरा श्रीकृष्ण से विनती कर रही हैं कि वे उनके नेत्रों में बस जाएँ। यह उनकी गहरी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है।
2.”बसों मेरे नैन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है?
विश्लेषण: यह पद श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की गहरी भक्ति और प्रेम को व्यक्त करता है। पंक्तियों में श्रीकृष्ण की मोहिनी मूरत, साँवली सूरत, और उनके आभूषणों का वर्णन भक्ति और प्रेम के भाव को दर्शाता है।
3.”बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?
विश्लेषण: पद में “सावन की बदरिया” और “नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे” जैसे वर्णन सावन मास और वर्षा ऋतु को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
4.”बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा-
विश्लेषण: इस पद में सावन की सुंदरता, बादलों का बरसना, और श्रीकृष्ण के आने की भनक सुनकर मीरा का मन उमंग और आनंद से भरा है। पंक्ति “आनंद मंगल गावन की” उनकी प्रसन्नता को दर्शाती है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: मैंने उपरोक्त उत्तर इसलिए चुने क्योंकि:
प्रश्न 1: पहला पद “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” स्पष्ट रूप से श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की भक्ति को दर्शाता है। मीरा श्रीकृष्ण से ही विनती कर रही हैं कि वे उनके हृदय और नेत्रों में बस जाएँ। अन्य विकल्प (संत, भक्त, वैज्ञानिक) इस संदर्भ में उपयुक्त नहीं हैं।
प्रश्न 2: इस पद में श्रीकृष्ण की रूप-सज्जा और भक्ति का वर्णन है, जो प्रेम और भक्ति के भाव को दर्शाता है। प्रकृति, युद्ध, या ज्ञान का इस पद में कोई उल्लेख नहीं है।
प्रश्न 3: “सावन की बदरिया” और वर्षा से संबंधित वर्णन स्पष्ट रूप से वर्षा ऋतु को इंगित करते हैं। सर्दी, गर्मी, या वसंत का कोई संदर्भ नहीं है।
प्रश्न 4: सावन का वर्णन और श्रीकृष्ण के आने की भनक सुनकर मीरा का मन उमंगों से भरा है, जो उनकी प्रसन्नता को दर्शाता है। पंक्तियाँ जैसे “आनंद मंगल गावन की” उनकी खुशी को स्पष्ट करती हैं।
अगर मेरे समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों, तो मैं उनसे उनके चयन का कारण पूछूँगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने “दुखी हैं” चुना, तो मैं पूछूँगा कि कविता की कौन-सी पंक्ति उनके इस चयन को समर्थन देती है। फिर हम कविता की पंक्तियों का विश्लेषण करके सही उत्तर पर सहमति बनाएँगे। यह चर्चा हमें कविता के भाव और अर्थ को गहराई से समझने में मदद करेगी।
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:-
| शब्द | अर्थ/संदर्भ |
|---|---|
| नंदलाल | नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
| वैजंती माल | वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला |
| सावन | श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना |
| गिरधर | पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की।।”
अर्थ और समझ: इस पंक्ति में मीरा सावन मास की वर्षा का सुंदर चित्रण कर रही हैं। “नन्हीं नन्हीं बूँदन” से तात्पर्य छोटी-छोटी बारिश की बूँदों से है, जो धीरे-धीरे बरस रही हैं और प्रकृति को ताजगी प्रदान कर रही हैं। “शीतल पवन सोहावन की” से पता चलता है कि ठंडी और सुहावनी हवा बह रही है, जो मन को शांति और आनंद दे रही है। यह पंक्ति सावन के मौसम की सुंदरता और उससे उत्पन्न होने वाली प्रसन्नता को दर्शाती है। साथ ही, यह मीरा के मन की उमंग को भी व्यक्त करती है, जो श्रीकृष्ण के आने की भनक सुनकर और अधिक बढ़ गई है। यह पंक्ति प्रकृति और भक्ति के भावों का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
समूह में साझा करने के लिए विचार:
(ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल।।”
अर्थ और समझ: इस पंक्ति में मीरा श्रीकृष्ण को अपने प्रभु के रूप में संबोधित कर रही हैं और उनकी महिमा का बखान कर रही हैं। “संतन सुखदाई” का अर्थ है कि श्रीकृष्ण संतों को सुख और शांति प्रदान करने वाले हैं। “भक्त वछल गोपाल” से तात्पर्य है कि श्रीकृष्ण अपने भक्तों से अत्यंत स्नेह करते हैं और उनका पालन-पोषण करते हैं, जैसे एक माता-पिता अपने बच्चे की देखभाल करते हैं। यह पंक्ति मीरा की गहरी भक्ति और श्रीकृष्ण के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाती है। यह दर्शाता है कि श्रीकृष्ण न केवल मीरा के लिए, बल्कि सभी भक्तों और संतों के लिए सुख और प्रेम के स्रोत हैं।
समूह में साझा करने के लिए विचार:
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
उत्तर: पहले पद में “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” में मीरा ने श्रीकृष्ण के रूप, गुणों और भक्ति के प्रति उनके महत्व का सुंदर वर्णन किया है। श्रीकृष्ण के बारे में निम्नलिखित बातें बताई गई हैं:
1. मोहिनी मूरति और साँवली सूरति: श्रीकृष्ण की छवि अत्यंत आकर्षक और मोहक है। उनकी साँवली सूरत मन को लुभाती है।
2.विशाल नेत्र: उनके बड़े और सुंदर नेत्र (“नेना बने विशाल”) मन को आकर्षित करते हैं और भक्तों को अपनी ओर खींचते हैं।
3.अधर पर मुरली: श्रीकृष्ण के होठों पर मुरली सजी है, जो सुधा (अमृत) जैसे रस से भरी धुन बजाती है (“अधर सुधा रस मूरलो राजति”)।
4.वैजंती माल: उनके सीने पर वैजयंती पौधे के बीजों से बनी माला सजती है (“उर वैजंती माल”), जो उनकी शोभा बढ़ाती है।
5.कमर पर घंटिकाएँ और नूपुर: उनकी कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ (“सुधर घटिका कटितट सोभित”) और पैरों में नूपुर (“नूपुर शब्द रसाल”) सजे हैं, जो मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
6.संतों को सुखदाई और भक्तों के रक्षक: श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं (“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल”)।
ये वर्णन श्रीकृष्ण की शारीरिक सुंदरता, उनके आभूषणों, और उनके भक्तों के प्रति प्रेम और करुणा को दर्शाते हैं।
(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
उत्तर: दूसरे पद में “बरसे बदरिया सावन की” में सावन मास की सुंदरता और उससे उत्पन्न होने वाली उमंग का वर्णन किया गया है। सावन के बारे में निम्नलिखित बातें बताई गई हैं:
1. बादलों का बरसना: सावन में बादल बरस रहे हैं (“बरसे बदरिया सावन की”), जो प्रकृति को ताजगी और सुंदरता प्रदान करते हैं।
2.मन की उमंग: सावन के आगमन से मीरा का मन उमंग और आनंद से भर गया है (“सावन में उमग्यो मेरो मनवा”)।
3.श्रीकृष्ण के आने की भनक: मीरा ने सुना है कि श्रीकृष्ण आ रहे हैं (“भनक सुनी हरि आवन की”), जो उनके आनंद का कारण है।
4.चारों दिशाओं से बादल: बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आ रहे हैं, और बिजली की चमक के साथ वर्षा की झड़ी लग रही है (“उमड़ घुमड़ चहुं दिश से आया, दामिन दमके झर लावन की”)।
5.नन्हीं बूँदें और शीतल पवन: छोटी-छोटी बारिश की बूँदें बरस रही हैं, और ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है (“नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की”)।
6.आनंद और मंगल का गायन: सावन की इस सुंदरता और श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति के कारण मीरा आनंद और मंगल के गीत गा रही हैं (“आनंद मंगल गावन की”)।
ये वर्णन सावन की प्राकृतिक सुंदरता, ठंडक, और उससे उत्पन्न होने वाली भक्ति और आनंद की भावना को दर्शाते हैं, जो मीरा के श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम से जुड़ा है।
(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
उत्तर:- कविता के दूसरे पद “बरसे बदरिया सावन की” में मीरा कहती हैं, “सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।” इससे पता चलता है कि मीरा ने श्रीकृष्ण के आने की भनक सुनी है, और यह संदेश उन्हें सावन के बादलों के माध्यम से मिला है। मेरे अनुमान से, बादलों ने मीरा को यह संदेश निम्नलिखित तरीके से दिया होगा:
क्या कहा होगा: बादलों ने गरजते हुए, अपनी गहरी और मधुर ध्वनि में मीरा से कहा होगा, “हे मीरा, तुम्हारे प्रिय नंदलाल, गिरधरनागर, सावन की इस सुहावनी बेला में तुमसे मिलने आ रहे हैं। उनकी मुरली की मधुर तान और वैजंती माल की शोभा तुम्हारे हृदय को और अधिक आनंदित करेगी। तैयार हो जाओ, क्योंकि गोपाल तुम्हारे नेत्रों में बसने और तुम्हारी भक्ति को पूर्ण करने आ रहे हैं।”
कैसे कहा होगा: बादलों ने यह संदेश सावन की वर्षा की नन्हीं-नन्हीं बूँदों और शीतल पवन के साथ दिया होगा। उनकी गरज में एक उत्साह और आनंद भरा होगा, जैसे कि वे स्वयं श्रीकृष्ण के आगमन की खुशी मना रहे हों। बिजली की चमक (“दामिन दमके”) और बादलों का उमड़-घुमड़कर चारों दिशाओं से आना (“उमड़ घुमड़ चहुं दिश से आया”) इस संदेश को और भी जीवंत और उत्साहपूर्ण बनाता। यह संदेश प्रकृति की लय और मधुर ध्वनियों के माध्यम से, जैसे बारिश की फुहारों और हवा की सरसराहट के साथ, मीरा के हृदय तक पहुँचा होगा, जिससे उनका मन उमंग और भक्ति से भर गया।
(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?
उत्तर: यदि मुझे मीरा से बातचीत करने का अवसर मिले, तो मैं उनकी भक्ति, जीवन, और कविता से प्रेरित होकर निम्नलिखित बातें कहूँगा और सवाल पूछूँगा:
क्या कहूँगा:
क्या पूछूँगा:
1. भक्ति का मार्ग: आपने इतनी गहरी भक्ति और श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम कैसे विकसित किया? क्या कोई विशेष घटना थी जिसने आपको इस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया?
2.सामाजिक बंधन: राजकुमारी होने के बावजूद आपने सामाजिक बंधनों को तोड़ा और संतों का जीवन अपनाया। उस समय समाज और परिवार के विरोध का सामना करने की शक्ति आपने कहाँ से प्राप्त की?
3.कविता रचना: आपके भजन इतने सरल और भावपूर्ण हैं कि हर कोई उन्हें गुनगुनाता है। आप इन भजनों की रचना कैसे करती थीं? क्या ये आपके हृदय की स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति थे?
4.सावन और श्रीकृष्ण: आपने सावन के मौसम को श्रीकृष्ण के आगमन से क्यों जोड़ा? क्या सावन की वर्षा और प्रकृति का सौंदर्य आपके लिए श्रीकृष्ण की उपस्थिति का प्रतीक था?
5.आज के लिए संदेश: आज के समय में लोग तनाव और भौतिकता में उलझे हैं। आप उन्हें श्रीकृष्ण की भक्ति और सादगी भरा जीवन जीने के लिए क्या सलाह देंगी?
चर्चा के लिए सुझाव: समूह में चर्चा करते समय, मैं अपने साथियों से पूछूँगा कि वे मीरा से क्या पूछना चाहेंगे और उनकी भक्ति से क्या प्रेरणा लेते हैं। हम कविता की पंक्तियों, जैसे “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” और “आनंद मंगल गावन की,” को आधार बनाकर यह समझने की कोशिश करेंगे कि मीरा की भक्ति और प्रकृति के प्रति उनका प्रेम आज भी क्यों प्रासंगिक है। साथ ही, हम यह भी चर्चा करेंगे कि बादलों का संदेश और श्रीकृष्ण की छवि हमारे जीवन में आनंद और शांति कैसे ला सकती है।
अगले पृष्ठ पर शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।
(क) “मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।”
इस पंक्ति में ‘साँवरि’ शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर ‘साँवली’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस तरह से लिखिए।
| कविता में शब्द | बोलचाल/लेखन में सामान्य रूप |
|---|---|
| नैनन | नैन / आँखें |
| सोभित | शोभित |
| भक्त वछल | भक्त वत्सल |
| बदरिया | बादल / बरसाती बादल |
| मेरो मनवा | मेरा मन |
| आवन | आना |
| दिश | दिशा |
| मेहा | मेघ / बारिश |
नीचे दिए गए स्थानों में श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए-
उत्तर:-
नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए-
उत्तर:-
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | 2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | 5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं। |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | 3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। |
| 5. उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | 1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। |
पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए। उदाहरण के लिए- ‘सावन के बादल बरस रहे हैं..’ या ‘सावन की बदरिया बरसती है…’ आदि।
उत्तर:-पद का चयन: मैं पहले पद “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” को एक अनुच्छेद के रूप में लिखूँगा।
अनुच्छेद: मीरा अपने हृदय से श्रीकृष्ण को पुकारती हैं कि वे उनके नेत्रों में सदा के लिए बस जाएँ। उनकी मोहक और साँवली मूरत, बड़े-बड़े विशाल नेत्र, और होंठों पर सजी मुरली, जो अमृत जैसे मधुर राग सुनाती है, मन को मोह लेती है। श्रीकृष्ण के सीने पर वैजयंती माला शोभा देती है, और उनकी कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ तथा पैरों में नूपुर मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं, जो उनकी भक्ति को पूर्ण करते हैं।
विश्लेषण: यह अनुच्छेद कविता की पंक्तियों को गद्य रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें श्रीकृष्ण की शारीरिक शोभा, उनके आभूषणों, और मीरा की भक्ति का वर्णन शामिल है। यह कविता के भाव को बनाए रखते हुए उसे सरल और सुसंगठित रूप में व्यक्त करता है।
नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे दिए गए हैं। अपने परिजनों, साथियों, शिक्षकों, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से इनके अर्थ समझिए और इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| 1. आँखों का तारा | बहुत प्रिय, लाडला, या वह जो बहुत कीमती हो। | मेरी छोटी बहन मेरे माता-पिता की आँखों का तारा है, वे उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं। |
| 2. आँखों पर पर्दा पड़ना | सच्चाई न देख पाना, धोखा खाना, या अनजाने में गलत निर्णय लेना। | उसकी चालाकी पर आँखों पर पर्दा पड़ गया, और मैंने उस पर भरोसा कर लिया। |
| 3. आँखों के आगे अँधेरा छाना | अचानक दुख, निराशा, या परेशानी के कारण मन का विचलित होना। | जब मैंने अपनी परीक्षा में असफलता की खबर सुनी, मेरी आँखों के आगे अँधेरा छा गया। |
| 4. आँख दिखाना | धमकी देना, गुस्सा दिखाना, या किसी को डराने की कोशिश करना। | उसने मुझे आँख दिखाकर कहा कि वह मेरी शिकायत करेगा। |
| 5. आँख का काँटा | वह व्यक्ति या चीज जो बहुत खराब लगे या जिससे जलन हो। | उसका घमंडी व्यवहार मेरे लिए आँख का काँटा बन गया है। |
| 6. आँखें फेरना | ध्यान न देना, अनदेखा करना, या किसी से मुँह मोड़ लेना। | उसने मेरी मदद की गुहार सुनी, पर आँखें फेर लीं। |
| 7. आँख भर आना | भावुक होकर आँसुओं से आँखों का भर जाना। | जब मैंने अपनी दादी की पुरानी तस्वीर देखी, मेरी आँखें भर आईं। |
| 8. आँखें चुराना | शर्मिंदगी, अपराधबोध, या डर के कारण नजरें न मिलाना। | गलती करने के बाद उसने मुझसे बात करते समय आँखें चुराईं। |
| 9. आँखों से उतारना | बहुत प्रेम से देखना या किसी को बहुत ध्यान से निहारना, जैसे उसे मन में बसा लेना। | मीरा श्रीकृष्ण की मूरत को आँखों से उतार रही थीं, जैसे वे उनके हृदय में बस गए हों। |
| 10. आँखों में खटकना | किसी चीज या व्यक्ति का अच्छा न लगना, मन में अरुचि या परेशानी पैदा करना। | उसका बार-बार झूठ बोलना मेरी आँखों में खटकता है। |
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।”
(क) इस पंक्ति में कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
उत्तर: कविता की पंक्ति “मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल” और पूरे पहले पद में श्रीकृष्ण की कई विशेषताएँ वर्णित हैं, जो मुझे बहुत आकर्षित करती हैं:
1. मोहनी मूरति और साँवरी सूरति: श्रीकृष्ण की साँवली और आकर्षक सूरत मुझे सबसे अधिक प्रभावित करती है। उनकी यह सौंदर्य भरी छवि, जैसा कि मीरा कहती हैं, मन को मोह लेती है और भक्ति के भाव को जागृत करती है।
2.विशाल नेत्र: उनके बड़े और सुंदर नेत्र, जो “नैना बने विशाल” में वर्णित हैं, मुझे बहुत आकर्षित करते हैं। ये नेत्र करुणा, प्रेम और शांति का प्रतीक हैं, जो भक्तों को अपनी ओर खींचते हैं।
3.मुरली की मधुर ध्वनि: पंक्ति “अधर सुधा रस मूरलो राजति” में वर्णित मुरली की मधुर धुन मुझे बहुत प्रभावित करती है। यह धुन न केवल संगीतमय है, बल्कि आत्मा को शांति और आनंद प्रदान करती है।
4. भक्त वछल गोपाल: कविता में “भक्त वछल गोपाल” से श्रीकृष्ण का भक्तों के प्रति स्नेह और उनकी रक्षा करने वाला स्वभाव मुझे बहुत आकर्षित करता है। यह दर्शाता है कि वे अपने भक्तों के लिए सदा सुलभ और दयालु हैं।
इनमें से सबसे अधिक आकर्षक मुझे उनकी साँवली सूरत और भक्तों के प्रति प्रेम भरा स्वभाव लगता है, क्योंकि यह उनकी शारीरिक और आंतरिक सुंदरता का संगम है, जो मीरा की भक्ति को और गहरा करता है।
(ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों? अपने जीवन से जुड़े किसी व्यक्ति या वस्तु के उदाहरण से बताइए।
उत्तर: मुझे किसी व्यक्ति का दयालुता और ईमानदारी का गुण सबसे अधिक आकर्षित करता है। दयालुता इसलिए, क्योंकि यह दूसरों के प्रति प्रेम और सहानुभूति को दर्शाता है, जो समाज को जोड़ता है। ईमानदारी इसलिए, क्योंकि यह व्यक्ति के चरित्र की सच्चाई और विश्वसनीयता को दर्शाता है, जो भरोसे का आधार बनता है। कविता में श्रीकृष्ण का “भक्त वछल” स्वभाव भी दयालुता को दर्शाता है, जो मुझे प्रेरित करता है।
उदाहरण: मेरे दादाजी का दयालु स्वभाव मुझे बहुत आकर्षित करता है। वे हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं, जैसे कि पड़ोस के एक गरीब परिवार को भोजन देना या किसी बीमार व्यक्ति के लिए दवा की व्यवस्था करना। उनकी यह दयालुता मुझे सिखाती है कि छोटे-छोटे कार्यों से भी दूसरों के जीवन में खुशी लाई जा सकती है। इसके अलावा, उनकी ईमानदारी, जैसे कि हमेशा सच बोलना और दूसरों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना, मुझे बहुत प्रभावित करता है। यह गुण मुझे जीवन में सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
(ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह्य विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्ति के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:- बाह्य विशेषताएँ (जो दिखाई देती हैं):
1. हँसमुख चेहरा: मैं हमेशा मुस्कुराने की कोशिश करता हूँ, जिससे लोग मेरे साथ सहज महसूस करते हैं। यह मेरी बाहरी शख्सियत का हिस्सा है, जो दूसरों को मेरे बारे में पहली धारणा देता है।
2.साफ-सुथरा पहनावा: मैं अपने कपड़े और स्वच्छता का ध्यान रखता हूँ, जो मेरे व्यक्तित्व को आकर्षक बनाता है और दूसरों को मेरे प्रति सकारात्मक प्रभाव देता है।
आंतरिक विशेषताएँ (जो व्यवहार से पता चलती हैं):
1. सहानुभूति: मैं दूसरों की परेशानियों को समझने और उनकी मदद करने की कोशिश करता हूँ। उदाहरण के लिए, जब मेरा दोस्त पढ़ाई में परेशान था, मैंने उसे समझाने में समय बिताया। यह मेरे व्यवहार से दिखता है।
2.धैर्य: मैं मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहकर समस्याओं का समाधान ढूँढने की कोशिश करता हूँ। जैसे, जब मेरी छोटी बहन गलती करती है, तो मैं उसे डाँटने के बजाय प्यार से समझाता हूँ।
विश्लेषण: कविता में श्रीकृष्ण की बाह्य विशेषताएँ (जैसे साँवली सूरत, वैजंती माल) और आंतरिक विशेषताएँ (जैसे भक्त वछल, संतन सुखदाई) दोनों का वर्णन है। उसी तरह, मैंने अपनी बाह्य और आंतरिक विशेषताओं को उनके प्रभाव के आधार पर चुना। समूह में चर्चा करते समय, मैं अपने साथियों से उनकी विशेषताएँ पूछूँगा और यह समझने की कोशिश करूँगा कि कैसे ये गुण हमारे व्यवहार और दूसरों के साथ संबंधों को प्रभावित करते हैं।
1. हवा से बोलती है, सुर में गीत सुनाती है,
होठों से छू जाए, तो मन को लुभाती है।
उत्तर:-
2.दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता,
ताल मिलाए ताल से, हर संगत में सजता।
उत्तर:-
3.शाहों में शामिल होती, फूँकों से संगीत सुनाती,
सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती।
उत्तर:-
4.तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना,
छेड़े जब अँगुलियाँ, बहे रागों का झरना।
उत्तर:-
–
5.दो हाथों से बजती है ये, ताल से थिरकें पैर,
हर उत्सव की है ये साथी, लटक गले ये करती सैर।
उत्तर:-
6.नागिन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जिसकी,
तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान है इसकी।
उत्तर:-
7.सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए,
कश्मीर की वादियों जैसा मधुर संगीत लाए।
उत्तर:-
8.छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता जाए,
घर-मंदिर का साथी, झंकार से मन बहलाए।
उत्तर:-
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनकी अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजिए और लिखिए-
उत्तर:-
1. मूरति – सूरति
2. सावन – पावन
3. उमड़ – घुमड़
4. नागर – सागर / गागर
5. नंदलाल – गोपाल
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