२. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु ।
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पद में लिखें)
(क) पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति? – …………….. (पृथ्वी पर कितने रत्न होते हैं?)
उत्तरम्: त्रीणि। (तीन)
(ख) अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति ? – ……….. (“यह मेरा है, यह पराया है” की गणना किनकी होती है?)
उत्तरम्: लघुचेतसाम्। (छोटी मानसिकता वालों की)
(ग) कार्याणि क्रेन सिध्यन्ति ? – ………… (कार्य किससे सिद्ध होते हैं?)
उत्तरम्: उद्यमेन । (परिश्रम से)
(घ) विद्या किं ददाति ? – ………… (विद्या क्या देती है?)
उत्तरम्: विनयम् । (विनय)
(ङ) जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी ? – ……….. (जननी और जन्मभूमि किससे श्रेष्ठ है?)
उत्तरम्: स्वर्गात् । (स्वर्ग से)
(च) लङ्का कीदृशी आसीत्? – …………… (लंका कैसी थी?)
उत्तरम्: स्वर्णमयी। (सोने की)
३. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु ।
(अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखो)
(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि सन्ति? (पृथ्वी पर तीन रत्न कौन-कौन से हैं?)
उत्तरम्:
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं सुभाषितं च सन्ति । (पृथ्वी पर तीन रत्न जल, अन्न और सुभाषित (मधुर वचन) हैं।)
(ख) उदारचरितानां भावः कः भवति ? (उदार चरित्र वाले लोगों का भाव कैसा होता है?)
उत्तरम्:
उदारचरितानां वसुधा एव कुटुम्बकम् अस्ति । (उदार चरित्र वालों के लिए पूरी धरती ही परिवार होती है।)
(ग) मृगाः स्वयमेव कस्य मुखे न प्रविशन्ति ? (मृग स्वयं किसके मुख में नहीं जाते?)
उत्तरम्:
मृगाः स्वयमेव सुप्तस्य सिंहस्य मुखे न प्रविशन्ति । (मृग स्वयं सोए हुए सिंह के मुख में नहीं जाते।)
(घ) अभिवादनशीलस्य नित्यं कानि वर्धन्ते ? (अभिवादनशील व्यक्ति की कौन-सी चीजें हमेशा बढ़ती हैं?)
उत्तरम्:
अभिवादनशीलस्य नित्यं चत्वारि आयुर्विद्यायशोबलं वर्धन्ते । (अभिवादनशील व्यक्ति की आयु, विद्या, यश और बल हमेशा बढ़ते हैं।)
(ङ) मनुष्यः धनात् किम् आप्नोति ? (मनुष्य को धन से क्या प्राप्त होता है?)
उत्तरम्:
मनुष्यः धनात् धर्मं प्राप्नोति । (मनुष्य को धन से धर्म प्राप्त होता है।)
(च) उत्पन्नेषु कार्येषु कीदृशं धनम् उपयोगाय न भवति ? (उत्पन्न हुए कार्यों में किस प्रकार का धन उपयोगी नहीं होता?)
उत्तरम्:
उत्पन्नेषु कार्येषु परहस्तगतं धनम् उपयोगाय न भवति । (दूसरों के हाथ में गया हुआ धन उत्पन्न हुए कार्यों में उपयोगी नहीं होता।)
४. चित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि रचयन्तु ।
(चित्र देखकर वाक्यों की रचना करो)
उदाहरणम्
वृक्षः फलानि यच्छति । त्वं फलानि स्वीकरोषि । अहं फलानि स्वीकरोमि ।
उत्तरम्:
(क) वृक्षः छायां यच्छति । छाया शीतला भवति । वयं छायायाम् विश्रामम् कुर्मः ।
(ख) वृक्ष: कर्गदम् यच्छति । कर्गदः उपयोगाय भवति। वयम् कर्गदेषु लिखामः ।
(ग) वृक्षः काष्ठं यच्छति । काष्ठम् इन्धनाय भवति। भवननिर्माणे काष्ठस्य आवश्यकता भवति ।
(घ) वृक्षः शुद्धं वायुं यच्छति । अनेन पर्यावरणस्य शुद्धिः भवति । शुद्धेन वायुना वयं स्वस्थाः भवामः ।
(ङ) वृक्षः पुष्पाणि यच्छति । पुष्पाणि सुगन्धं प्रसारयन्ति । पुष्पाणां माला भवति ।
Hindi Translate
उदाहरण –
वृक्ष फल देता है।
तुम फल लेते हो।
मैं फल लेता हूँ।
उत्तर:
(क) वृक्ष छाया देता है। छाया ठंडी होती है। हम छाया में विश्राम करते हैं।
(ख) वृक्ष कागज देता है। कागज उपयोगी होता है। हम कागज पर लिखते हैं।
(ग) वृक्ष लकड़ी देता है। लकड़ी ईंधन के लिए उपयोगी होती है। भवन निर्माण में लकड़ी की आवश्यकता होती है।
(घ) वृक्ष शुद्ध वायु देता है। इससे पर्यावरण की शुद्धि होती है। शुद्ध वायु से हम स्वस्थ रहते हैं।
(ङ) वृक्ष फूल देता है। फूल सुगंध फैलाते हैं। फूलों की माला बनती है।
५. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति लिखन्तु ।
(अधोलिखित वाक्यों को पढ़कर ‘हाँ’ अथवा ‘नहीं’ में लिखो ।)
यथा – किं पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि सन्ति? (आम्)
(क्या पृथ्वी पर तीन रत्न हैं?)
(क) त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं पाषाणः च सन्ति? (क्या तीन रत्न जल, अन्न और पाषाण हैं?)
उत्तरम्: न
(ख) किं धर्मेण सुखं प्राप्यते ? (क्या धर्म से सुख प्राप्त होता है?)
उत्तरम्: आम्
(ग) किं विद्या विनयं ददाति ? (क्या विद्या विनय देती है?)
उत्तरम्: आम्
(घ) किम् अभिवादनशीलस्य विद्या वर्धते ? (क्या अभिवादनशील व्यक्ति की विद्या बढ़ती है?)
उत्तरम्: आम्
(ङ) किम् उद्यमेन कार्याणि नश्यन्ति ? (क्या परिश्रम से कार्य नष्ट हो जाते हैं?)
उत्तरम्: न
(च) किं जन्मभूमि स्वर्गात् गरीयसी भवति ? (क्या जन्मभूमि स्वर्ग से श्रेष्ठ होती है?)
उत्तरम्: आम्
६. चित्रे दर्शितस्य नाम लिङ्गं च निर्दिशन्तु ।
उत्तरम्:
७. वलये पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु ।
(घेरे में पदों को लिख कर सुभाषित पूरा करो।)
उत्तरम्:
८. पट्टिकातः पदानि चित्वा निर्देशानुसार पदानि लिखन्तु ।
(पट्टी से पदों को चुनकर निर्देशानुसार पद लिखो ।)
जननी धैर्यम् विद्या विनयः निजः पत्रम् बुद्धि: मूलम् पराक्रमः शक्तिः धनम् उद्यमः
(क) प्रथमान्त-पुंलिङ्गपदानि सन्ति
उत्तरम्:
1. उद्यमः
2. विनयः
3. निजः
4. पराक्रमः
(ख) प्रथमान्त – स्त्रीलिङ्गपदानि सन्ति
उत्तरम्:
1. वसुधा
2. जननी
3. विद्या
4. बुद्धिः
5. शक्ति:
(ग) प्रथमान्त नपुंसकलिङ्गपदानि सन्ति
उत्तरम्:
1. साहसम्
2. धैर्यम्
3. पत्रम्
4. मूलम्
5. धनम्
९. पाठगतानि सुभाषितानि स्मृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।
(पाठ में आए सुभाषितों को याद करके रिक्तस्थानों को पूरा करें।)
(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि ……… सुभाषितम्।
उत्तरम्: पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नम् सुभाषितम्।
(ख) उदारचरितानां तु ……….. कुटुम्बकं भवति ।
उत्तरम्: उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकं भवति ।
(ग) उद्यमेन हि ………. सिद्ध्यन्ति ।
उत्तरम्: उद्यमेन हि कार्याणि सिद्ध्यन्ति ।
(घ) अभिवादनशीलस्य वृद्धोपसेविनः ……….. वर्धन्ते ।
उत्तरम्: अभिवादनशीलस्य वृद्धोपसेविनः चत्वारि आयुर्विद्या यशोबलं वर्धन्ते ।
(ङ) उद्यमः …………. पराक्रमः ।
उत्तरम्: उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः वर्त्तन्ते, तत्र देवः सहायकृत् पराक्रमः ।
(च) विद्या ………… ददाति ।
उत्तरम्: विद्या विनयं ददाति ।
(छ) जननी जन्मभूमिश्च ……….. गरीयसी भवति ।
उत्तरम्: जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी भवति ।
Hindi Translate
(क) पृथ्वी पर तीन रत्न ……… सुभाषित हैं।
उत्तर: पृथ्वी पर तीन रत्न जल, अन्न और सुभाषित हैं।
(ख) उदार चरित्र वाले लोगों के लिए ……….. कुटुंब होता है।
उत्तर: उदार चरित्र वालों के लिए वसुधैव कुटुंब होता है।
(ग) परिश्रम से ही ………. कार्य सिद्ध होते हैं।
उत्तर: परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं।
(घ) अभिवादनशील और वृद्धों की सेवा करने वाले के ……….. बढ़ते हैं।
उत्तर: अभिवादनशील और वृद्धों की सेवा करने वाले की आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।
(ङ) परिश्रम …………. साहस और पराक्रम है।
उत्तर: परिश्रम, साहस, धैर्य और बुद्धि के साथ होता है, और वहां देवता सहायता करते हैं।
(च) विद्या ………… देती है।
उत्तर: विद्या विनय देती है।
(छ) जननी और जन्मभूमि ……….. श्रेष्ठ होती हैं।
उत्तर: जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ होती हैं।
१०. चित्राणि दृष्ट्वा उचितान् श्लोकांशान् लिखन्तु । (चित्र देखकर उचित श्लोकों का अंश लिखो)
उत्तरम्:
(क) उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि । (परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं।)
(ख) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नम् सुभाषितम्। (पृथ्वी पर तीन रत्न हैं: जल, अन्न, और सुभाषित (मधुर वचन)।)
(ग) जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी । (जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं।)
(घ) पात्रत्वाद् धनम् आप्नोति । (योग्यता से ही धन प्राप्त होता है।)
(ङ) उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् । (उदार चरित्र वालों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार है।)
The Class 9 Syllabus 2026–27 CBSE introduces several improvements designed to make learning more meaningful,…
The ISRO YUVIKA 2026 (Young Scientist Program) offers Class 9 students a unique opportunity to…
Looking for effective exam preparation? This CBSE Class 8 Science Practice Paper 2026 with Answer…
Looking for effective exam preparation? This CBSE Class 8 Science Practice Paper 2026 with Answer…
Looking for effective exam preparation? This CBSE Class 8 Science Practice Paper 2026 with Answer…
Access the Chapter-wise NCERT Solutions for Class 1 Maths to enhance your learning experience and…