संस्कृत Solutions Class 6 Chapter 15 Sanskrit Deepakam

वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

वयम् अभ्यासं कुर्मः

२. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु ।

(क) वृक्षा: स्वयं कुत्र तिष्ठन्ति ? (वृक्ष कहाँ खड़े रहते हैं?)

उत्तरम्: आतपे (धूप में)

(ख) परोपकाराय का वहन्ति ? (परोपकार के लिए कौन बहती हैं?)

उत्तरम्: नद्यः (नदियाँ)

(ग) दशवापीसमः कः भवति ? (दस तालाबों के समान कौन होता है?)

उत्तरम्: हृदः (झील)

(घ) सत्पुरुषाः इव के सन्ति? (अच्छे पुरुषों के समान कौन होते हैं?)

उत्तरम्: वृक्षा: (वृक्ष)

(ङ) अर्थिनः केभ्यः विमुखाः न यान्ति ? (माँगने वाले लोग किनसे मुँह नहीं मोड़ते हैं?)

उत्तरम्: वृक्षेभ्यः महीरुहेभ्यः (वृक्ष और बड़े पेड़)

(च) वृक्षा: स्वयं कानि न खादन्ति ? (वृक्ष अपने क्या नहीं खाते?)

उत्तरम्: फलानि (फल)

३. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु ।

(पाठ के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखें।)

(क) नद्यः किं न पिबन्ति ? (नदियाँ क्या नहीं पीतीं?)

उत्तरम्:

नद्यः स्वयमेव अम्भः न पिबन्ति । (नदियाँ अपना ही पानी नहीं पीतीं।)

(ख) वृक्षाः अस्मभ्यं किं किं यच्छन्ति ? (वृक्ष हमें क्या-क्या देते हैं?)

उत्तरम्:

वृक्षाः अस्मभ्यं पुष्पं फलं, छायां, मूलं वल्कलं, दारूं च यच्छन्ति । (वृक्ष हमें फूल, फल, छाया, जड़, छाल और लकड़ी देते हैं।)

(ग) इदं शरीरं किमर्थम् अस्ति ? (यह शरीर किसके लिए है?)

उत्तरम्:

इदं शरीरं परोपकाराय अस्ति । (यह शरीर परोपकार के लिए है।)

(घ) दशपुत्रसमः कः भवति ? (दस पुत्रों के समान कौन होता है?)

उत्तरम्:

दशपुत्रसम: द्रुमः भवति । (दस पुत्रों के समान एक पेड़ होता है।)

(ङ) केषां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति ? (किनकी विभूतियाँ परोपकार के लिए होती हैं?)

उत्तरम्:

सतां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति । (सज्जनों की विभूतियाँ परोपकार के लिए होती हैं।)

(च) अन्यस्य छायां के कुर्वन्ति ? (दूसरों के लिए छाया कौन करता है?)

उत्तरम्:

अन्यस्य छायां वृक्षाः कुर्वन्ति । (वृक्ष दूसरों के लिए छाया करते हैं।)

४. पट्टिकातः उचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु । (तालिका से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों को भरें।)

यथा – छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे । (जैसे वृक्ष दूसरों को छाया देते हैं और स्वयं धूप में खड़े रहते हैं।)

(क) फलान्यपि परार्थाय ………… सत्पुरुषा इव ।

उत्तरम्:  वृक्षा:

(वृक्ष भी दूसरों के लिए फल देते हैं, जैसे सज्जन पुरुष।)

(ख) दशह्रदसमः पुत्र ……… समो द्रुमः ।

उत्तरम्:  दशपुत्रः

(दस पुत्रों के समान एक वृक्ष होता है।)

(ग) ……….. येषां वै विमुखा यान्ति नार्थिनः ।

उत्तरम्:  सुजनस्येव

(जिनसे याचक कभी विमुख होकर नहीं जाते, जैसे सज्जन पुरुष।)

(घ) ………. इदं शरीरम् ।

उत्तरम्:  परोपकाराय

(यह शरीर परोपकार के लिए है।)

(ङ) स्वयं न खादन्ति ……… वृक्षाः ।

उत्तरम्:  फलानि

(वृक्ष स्वयं फल नहीं खाते।)

(च) परोपकाराय सतां ……… ।

उत्तरम्:  विभूतयः

(सज्जनों की सम्पत्तियाँ परोपकार के लिए होती हैं।)

५. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितेषु वाक्येषु स्थूलाक्षरपदानां विभक्तिं निर्दिशन्तु ।

(नीचे दिए गए वाक्यों में मोटे अक्षरों में लिखे शब्दों की विभक्ति बताएं।)

यथा – वृक्षाः अन्यस्य कृते  छायां  कुर्वन्ति ।  द्वितीया विभक्तिः

(क) वृक्षाः परार्थाय  फलानि  यच्छन्ति ।  (वृक्ष दूसरों के लिए फल देते हैं।)

उत्तरम्:

फलानि – द्वितीया विभक्ति

(ख) वृक्षाः  सत्पुरुषाः  इव सन्ति ।  (वृक्ष अच्छे पुरुषों के समान होते हैं।)

उत्तरम्:

सत्पुरुषाः – प्रथमा विभक्ति

(ग)  द्रुमः दशसन्तानसमः भवति । (पेड़ दस संतानों के समान होता है।)

उत्तरम्:

द्रुमः – प्रथमा विभक्ति

(घ) वृक्ष:  प्राणिभ्यः  काष्ठानि यच्छति । (वृक्ष प्राणियों को लकड़ी देते हैं।)

उत्तरम्:

प्राणिभ्यः – चतुर्थी विभक्ति

(ङ)  नद्यः  जलं स्वयमेव न पिबन्ति । (नदियाँ स्वयं पानी नहीं पीतीं।)

उत्तरम्:

नद्यः – प्रथमा विभक्ति

(च) सज्जनानां  सङ्गतिं  करोतु । (सज्जनों की संगति करें।)

उत्तरम्:

सङ्गतिं – द्वितीया विभक्ति

६. अधोलिखितानां पदानां द्विवचने बहुवचने च रूपाणि लिखन्तु ।

(नीचे दिए गए शब्दों के द्विवचन और बहुवचन रूप लिखें।)

यथा – वृक्षः वृक्षौ वृक्षा:

(क) मेघः ………….. ……………..

(ख) हृदः ………….. ……………..

(ग) सत्पुरुषः ………….. ……………..

(घ) छाया ………….. ……………..

(ङ) वापी ………….. ……………..

(च) नदी ………….. ……………..

(छ) शरीरम् ………….. ……………..

(ज) पुष्पम् ………….. ……………..

उत्तरम्:

(क) मेघ:         मेघौ           मेघाः
(ख) हृदः         हृदौ           हृदा:
(ग) सत्पुरुषः   सत्पुरुषौ   सल्पुरुषाः
(घ) छाया        छाये          छाया:
(ङ) वापी        वाप्यौ        वाप्यः
(च) नदी          नद्यौ          नद्यः
(छ) शरीरम्     शरीरे       शरीराणि
(ज) पुष्पम्       पुष्पे         पुष्पाणि

७. अधोलिखितानां पदानां परस्परं समुचितं मेलनं कृत्वा ‘कः किं ददाति’ इति लिखन्तु ।

(नीचे दिए गए शब्दों का सही मिलान कर ‘कौन क्या देता है’ लिखें।)

(क) वृक्षः           दुग्धम्              वृक्षः शुद्धं वायुं ददाति ।

(ख) गौ:            प्रकाशं              …………………

(ग) सूर्य:            विद्यां               ……………..

(घ) नदी           शुद्धं वायुं         ……………

(ङ) अग्निः        जलम्ं             ………………

(च) शिक्षक:     तापं                ……………

उत्तरम्:

(क) वृक्षः – वृक्षः शुद्धं वायुं ददाति । (वृक्ष शुद्ध हवा देते हैं।)

(ख) गौ: – गौ: दुग्धं ददाति । (गाय दूध देती है।)

(ग) सूर्य: – सूर्य: प्रकाशं ददाति । (सूर्य प्रकाश देता है।)

(घ) नदी – नदी जलं ददाति । (नदी पानी देती है।)

(ङ) अग्निः – अग्निः तापं ददाति (अग्नि गर्मी देती है।)

(च) शिक्षक: – शिक्षक: विद्यां ददाति । (शिक्षक ज्ञान देते हैं।)

८. अधोलिखितानां क्रियापदानां लट्लकारे प्रथमपुरुषस्य रूपाणि लिखन्तु ।

(नीचे दिए गए क्रियापदों का लट्लकार (वर्तमान काल) में प्रथम पुरुष (तीसरे व्यक्ति) का रूप लिखें।)

यथा – कुर्वन्ति – करोति कुरुतः कुर्वन्ति

तिष्ठन्ति – …… …….. ………

फलन्ति – …… …….. ………

यान्ति – …… …….. ………

पिबन्ति – …… …….. ………

खादन्ति – …… …….. ………

उत्तरम्:

तिष्ठन्ति – तिष्ठति तिष्ठतः तिष्ठन्ति

  • तिष्ठति – वह खड़ा होता है।
  • तिष्ठतः – वे दोनों खड़े होते हैं।
  • तिष्ठन्ति – वे सभी खड़े होते हैं।

फलन्ति – फलति फलतः फलन्ति

  • फलति – वह फल देता है / फलता है।
  • फलतः – वे दोनों फलते हैं।
  • फलन्ति – वे सभी फलते हैं।

यान्ति – याति यातः यान्ति

  • याति – वह जाता है।
  • यातः – वे दोनों जाते हैं।
  • यान्ति – वे सभी जाते हैं।

पिबन्ति – पिबति पिबतः पिबन्ति

  • पिबति – वह पीता है।
  • पिबतः – वे दोनों पीते हैं।
  • पिबन्ति – वे सभी पीते हैं।

खादन्ति – खादति खादतः खादन्ति

  • खादति – वह खाता है।
  • खादतः – वे दोनों खाते हैं।
  • खादन्ति – वे सभी खाते हैं।