अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न (क): निम्नलिखित प्रश्नों के उचित उत्तर के सामने सही (✓) का निशान लगाएँ।
- पिताजी ने कहा कि घर साय बना हुआ है क्योंकि-
- घर की बनावट साय जैसी बहुत विशाल है
- घर में विभिन्न परिंदे और जल-जनु रहते हैं
- पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं (✓)
- घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
विश्लेषण: पिताजी कहते हैं कि वे घर के मालिक नहीं, बल्कि मेहमान हैं, क्योंकि चिड़ियाँ और अन्य जीव घर में रहते हैं ।
- कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
- माँ और पिताजी को जिनमें रहने की इच्छा थी
- लेखक को जिन्होंने यह कहानी लिखी
- जीव-जंतुओं को जो उसमें घर में रहते थे (✓)
- मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
विश्लेषण: चिड़ियाँ और अन्य जीव-जंतु घर में स्वतंत्र रूप से रहते हैं, इसलिए उन्हें असली मालिक कहा गया ।
- चिड़ियों के प्रवेश पर माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ क्या थीं?
- दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
- पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया (✓)
- दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
- माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
विश्लेषण: पिताजी चिड़ियों को निकालना चाहते थे, लेकिन माँ ने हँसकर और व्यंग्य से उनका विरोध किया ।
- माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुस्कुराती और मजाक करती थीं, इससे क्या पता चलता है?
- माँ चाहती थीं कि चिड़ियाँ घर से भगाए न जाएँ (✓)
- माँ को पिताजी के उपाय नहीं भाते थे
- माँ को चिड़ियों को भगाने की गतिविधियों पर हँसी थी
- माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
विश्लेषण: माँ का हँसना और मजाक करना दर्शाता है कि वे चिड़ियों के प्रति सहानुभूति रखती थीं और उन्हें भगाने के खिलाफ थीं ।
- कहानी में चिड़ियों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
- दूसरों पर निर्भर रहना
- असफलताओं में हार मान लेना
- अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना (✓)
- सब कुछ छोड़कर कहीं और चले जाना
विश्लेषण: चिड़ियाँ बार-बार लौटती हैं, जो उनके अपने घर (घोंसले) के प्रति दृढ़ता और प्रयास को दर्शाता है ।
प्रश्न (ख): हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार-विमर्श कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर (ख): मैंने उपरोक्त उत्तर इसलिए चुने:
- प्रश्न 1: पिताजी का कहना कि वे मेहमान हैं, यह दर्शाता है कि जीव-जंतु घर के असली मालिक हैं। अन्य विकल्प कहानी के संदर्भ से मेल नहीं खाते।
- प्रश्न 2: चिड़ियाँ और जीव-जंतु घर में स्वतंत्र रहते हैं, इसलिए वे असली मालिक हैं।
- प्रश्न 3: माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ विरोधाभासी थीं; पिताजी निकालना चाहते थे, माँ सहानुभूति दिखाती थीं।
- प्रश्न 4: माँ का मजाक चिड़ियों के प्रति उनकी सहानुभूति को दर्शाता है, न कि उपहास की आदत।
- प्रश्न 5: चिड़ियों का बार-बार लौटना दृढ़ता का प्रतीक है, जो कहानी में स्पष्ट है।
विचार-विमर्श: मित्रों के साथ चर्चा में, कहानी के हास्य, सहानुभूति, और चिड़ियों की दृढ़ता पर ध्यान देना चाहिए ताकि उत्तरों की समझ स्पष्ट हो ।
प्रश्न: मिलाकर करें मिलान
कॉलम 1 की पंक्तियों को कॉलम 2 के सही अर्थ से मिलाएँ:
- वह शोर मचाता है कि कानों के परदे फट जाएँ → 2. पिताजी का गुस्सा चिड़ियों की चहचहाहट से बढ़ जाता है, लेकिन लोग इसे संगीतमय समझते हैं।
- अंगन में आम का पेड़ ही सबसे सुंदर → 1. आम के पेड़ पर अलग-अलग पक्षी आकर चहचहाते हैं।
विश्लेषण: पहली पंक्ति पिताजी के गुस्से और चिड़ियों के शोर को दर्शाती है, जो दूसरों को संगीतमय लगता है। दूसरी पंक्ति आम के पेड़ को पक्षियों के आकर्षण का केंद्र बताती है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: बदली कहानी
मन में आए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते, तो ऐसी में कहानी कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
उत्तर: यदि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते, तो कहानी इस प्रकार होती:
पिताजी को चिड़ियों के शोर और गंदगी से परेशानी होती। वे लाठी लेकर घोंसला तोड़ने की कोशिश करते, और माँ फिर भी हँसकर उनका मजाक उड़ातीं। चिड़ियाँ बार-बार लौटतीं, लेकिन बिना बच्चों के, पिताजी का गुस्सा बढ़ता जाता। अंत में, वे घोंसला पूरी तरह तोड़ देते, और चिड़ियाँ हमेशा के लिए चली जातीं। माँ उदास होकर कहतीं, “अब घर सूना हो गया।” पिताजी को अपनी गलती का एहसास होता, लेकिन चिड़ियाँ लौटती नहीं। कहानी का अंत दुखद होता, जो सहानुभूति के बजाय पछतावे पर केंद्रित होता।
विश्लेषण: बच्चों की अनुपस्थिति कहानी को सहानुभूति से वंचित कर देती, और पिताजी का गुस्सा हावी रहता, जिससे नैतिक संदेश कमजोर पड़ता ।
प्रश्न: कहने के ढंग/क्रिया विशेषण
निम्नलिखित रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
(क) “पिताजी ने झिड़ककर कहा”, “तू खड़ा क्या देख रहा है”
(ख) “खीझ दी”, “खीझकर बोली माँ”
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो”, “उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
अब आप इन मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
उत्तर:
वाक्य निर्माण:
(क) झिड़ककर:
- शिक्षक ने झिड़ककर कहा, “तुम होमवर्क क्यों नहीं लाए?”
- भाई ने झिड़ककर बोला, “तू हमेशा मेरा सामान बिगाड़ता है!”
(ख) खीझकर: - माँ ने खीझकर कहा, “बार-बार एक ही बात क्यों पूछते हो?”
- दुकानदार ने खीझकर जवाब दिया, “यह सामान वापस नहीं होगा।”
(ग) गुस्से में: - पिताजी ने गुस्से में कहा, “यह काम अभी पूरा करो!”
- दोस्त ने गुस्से में चिल्लाया, “तुमने मेरा सामान क्यों छुआ?”
मिलते-जुलते क्रिया विशेषण और वाक्य:
- चिढ़कर:
- बहन ने चिढ़कर कहा, “तुम हमेशा मेरा मजाक क्यों उड़ाते हो?”
- बच्चे ने चिढ़कर बोला, “मुझे यह खेल पसंद नहीं!”
- हँसकर:
- दादी ने हँसकर कहा, “तुम्हारी शरारतें मुझे याद दिलाती हैं।”
- मित्र ने हँसकर बोला, “तू तो हर बार यही गलती करता है!”
- सहमकर:
- बच्चा सहमकर बोला, “मुझे अंधेरे से डर लगता है।”
- वह सहमकर पूछने लगा, “क्या यह सचमुच भूत था?”
विश्लेषण: ये क्रिया विशेषण भावनाओं को व्यक्त करते हैं और वाक्य को जीवंत बनाते हैं। कहानी में ये पात्रों के मनोभावों को उजागर करते हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न (क): आपको इस कहानी में ऐसी कौन-सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं। उन्हें अपने पाठ्यपुस्तक के साथ मिलकर पढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर (क): कहानी की विशेषताएँ:
- हास्य: माँ का पिताजी के प्रयासों पर हँसना और व्यंग्य ।
- सहानुभूति: चिड़ियों के बच्चों के प्रति पिताजी का बदलता दृष्टिकोण ।
- प्रकृति के प्रति प्रेम: चिड़ियों को अंत में स्वीकार करना ।
- पारिवारिक गतिशीलता: माँ और पिताजी के बीच हास्यपूर्ण संवाद ।
- नैतिक संदेश: सहानुभूति और धैर्य का महत्व ।
प्रश्न (ख): इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।
उत्तर (ख):
- किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना:
- उदाहरण: “वह शोर मचाता है कि कानों के परदे फट जाएँ” ।
- विश्लेषण: चिड़ियों का शोर अतिशयोक्ति से वर्णित है।
- हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना:
- उदाहरण: माँ का कहना, “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्या रहा है?”।
- विश्लेषण: माँ का व्यंग्य हास्य उत्पन्न करता है।
- सोचा कुछ और, हुआ कुछ और:
- उदाहरण: पिताजी चिड़ियों को भगाना चाहते थे, लेकिन बच्चों को देखकर उन्हें रहने दिया ।
- विश्लेषण: पिताजी का इरादा बदल गया।
- दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना:
- उदाहरण: माँ ने चिड़ियों के चहचहाने को उनके संवाद के रूप में अनुमानित किया ।
- विश्लेषण: माँ ने चिड़ियों के व्यवहार को मानवीय भावनाओं से जोड़ा।
- किसी की कही बात को उनके शब्दों में लिखना:
- उदाहरण: “छोड़ो जी, छोड़ो तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालो”।
- विश्लेषण: माँ के शब्द सीधे उद्धृत किए गए।
- किसी प्राणी या उसके कार्यों को कोई अन्य नाम देना:
- उदाहरण: चिड़ियों को “घर के असली मालिक” कहा गया ।
- विश्लेषण: यह उपमा चिड़ियों की स्वतंत्रता को दर्शाती है।
- किसने किससे कोई बात कही, यह साफ-साफ बताए बिना उस संवाद को लिखना:
- उदाहरण: “निकलेंगी कैसे नहीं?” पिताजी बोले ।
- विश्लेषण: संवाद संक्षिप्त और स्वाभाविक है।
प्रश्न (ग): आपकी बात
- “घर में चिड़ियाँ घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘ची-ची’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आसपास चिड़ियों को कब-कब देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तर 1: मैंने अपने घर की बालकनी में चिड़ियाँ अक्सर देखी हैं, विशेष रूप से सुबह जब वे दाना चुगने आती हैं। उनके व्यवहार में उत्साह, सतर्कता, और सामाजिकता दिखती है। वे एक-दूसरे से चहचहाकर संवाद करती हैं, जो खुशी और समुदाय का भाव दर्शाता है। कभी-कभी खतरे पर वे तेजी से उड़ जाती हैं, जो डर और सावधानी को दिखाता है। - “अब घर में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुस्कुराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी चिड़ियों को अपने घर में स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या किसी अन्य जीव के साथ साझा करते हैं? उनके साथ व्यवहार में यदि कोई समस्या आती है, तो उसे कैसे सुलझाते हैं?
उत्तर 2: मैं अपने घर की छत पर गौरैया और कबूतरों के साथ स्थान साझा करता हूँ। वे वहाँ दाना चुगने और पानी पीने आते हैं। समस्या तब आती है जब वे गंदगी करते हैं। मैं इसे सुलझाने के लिए नियमित सफाई करता हूँ और उनके लिए अलग से दाना-पानी रखता हूँ, ताकि वे परेशान न हों। इससे सह-अस्तित्व आसान हो जाता है। - परिवार के लोग चिड़ियों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु चिड़ियों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
उत्तर 3: हाँ, एक बार मैं एक पड़ोसी से परेशान था क्योंकि वह जोर-जोर से बात करता था। लेकिन जब मैंने उनसे बात की, तो पता चला कि वे बहुत दयालु और मददगार हैं। उनकी मदद से मेरे परिवार ने एक कठिन समय में सहायता पाई। इससे मेरा उनके प्रति दृष्टिकोण बदल गया, और अब मैं उनकी आदतों को सहजता से स्वीकार करता हूँ।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न (क): आपको इस कहानी में कौन-कौन से व्यंग्य प्रकट हुए हैं? उसे उद्धृत करके लिखिए।
उत्तर (क):
- उद्धरण: “छोड़ो जी, छोड़ो तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालो।”
- विश्लेषण: माँ का यह व्यंग्य पिताजी की असफलता पर हल्का उपहास है, जो उनकी कोशिशों को हास्यपूर्ण बनाता है।
- उद्धरण: “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्या रहा है?”
- विश्लेषण: माँ ने पिताजी के कूदने और ताली बजाने को चिड़ियों के दृष्टिकोण से मजाकिया ढंग से प्रस्तुत किया।
- उद्धरण: “इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।”
- विश्लेषण: माँ का यह कथन पिताजी के जटिल प्रयासों पर सरल समाधान सुझाकर व्यंग्य करता है।
प्रश्न (ख): अब इनमें से कौन-कौन से व्यंग्य “हास्य व्यंग्य” कहे जा सकते हैं? अब इन पर सही का निशान लगाइए।
उत्तर (ख):
- उपरोक्त सभी व्यंग्य हास्य व्यंग्य हैं, क्योंकि वे पिताजी की कोशिशों को हल्के-फुल्के और मजाकिया ढंग से प्रस्तुत करते हैं, बिना किसी को ठेस पहुँचाए।
- “छोड़ो जी, छोड़ो तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालो।” (✓)
- “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्या रहा है?” (✓)
- “इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।” (✓)
विश्लेषण: ये व्यंग्य हास्य उत्पन्न करते हैं और कहानी को मनोरंजक बनाते हैं ।