अभ्यास के अंतिम प्रश्नों के उत्तर (हिन्दी में)
पेज 5: पक्तियों पर चर्चा
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि सुभाषचंद्र बोस एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ धन और संसाधनों का असमान वितरण न हो। प्रत्येक व्यक्ति को आर्थिक रूप से समान अवसर मिलें, ताकि गरीबी और अभाव समाप्त हो। यह समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में एक कदम है।
(ख) “यही स्वप्न उनकी शक्ति का उद्गम बना और उनके आनंद का निर्धारण रहा।”
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि सुभाषचंद्र बोस का स्वप्न (स्वाधीन और समान समाज) उनकी प्रेरणा और शक्ति का स्रोत था। यह स्वप्न उन्हें संघर्ष करने और बलिदान देने की ऊर्जा देता था, साथ ही उनके जीवन को आनंद और उद्देश्य प्रदान करता था।
(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हों।”
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि बोस एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक, और मानसिक बंधनों से मुक्त हो। इसका मतलब है कि जाति, लिंग, धर्म, या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव न हो, और प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र रूप से अपनी क्षमताओं का उपयोग कर सके।
पेज 5: सोच-विचार के लिए
(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
उत्तर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने एक स्वाधीन, समान, और प्रगतिशील राष्ट्र का स्वप्न देखा था। यह राष्ट्र जातिभेद, आर्थिक विषमता, और सामाजिक दबाव से मुक्त हो, जहाँ नारी-पुरुष को समान अधिकार मिलें, प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति के अवसर प्राप्त हों, और श्रम व कर्म को सम्मान मिले। यह राष्ट्र विश्व के समक्ष एक आदर्श के रूप में स्थापित हो।
(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सर्वशक्तता के रूप में देखा?
उत्तर: नेताजी ने भारत की स्वतंत्रता और एक आदर्श समाज के निर्माण को अपने जीवन की सर्वशक्तता के रूप में देखा। वे चाहते थे कि भारत एक स्वाधीन राष्ट्र बने, जो सामाजिक और आर्थिक समानता पर आधारित हो और विश्व में आदर्श प्रस्तुत करे। इस लक्ष्य के लिए उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया और बलिदान की प्रेरणा दी।
(ग) “आदमों तथा अकर्मण्यों के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने यह कहा क्योंकि वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ प्रत्येक व्यक्ति कर्मठ और सक्रिय हो। वे चाहते थे कि समाज में आलस्य, निष्क्रियता, और अकर्मण्यता न हो, बल्कि सभी लोग श्रम और कर्म के माध्यम से समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दें। अकर्मण्य लोग समाज की प्रगति में बाधा बनते हैं, इसलिए उनके लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों का लेखा जोखा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
उत्तर: आज की युवा पीढ़ी नेताजी के लक्ष्यों को साकार करने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकती है:
- शिक्षा और जागरूकता: युवा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समानता और जातिभेद के खिलाफ जागरूकता फैला सकते हैं।
- सामाजिक कार्य: सामाजिक कार्यों में भाग लेकर गरीबी, असमानता, और अशिक्षा को दूर करने में योगदान दे सकते हैं।
- नारी सशक्तीकरण: नारी के अधिकारों और समानता के लिए कार्य कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय एकता: विभिन्न समुदायों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं।
- कर्मठता: अपने कार्यों में मेहनत और समर्पण के साथ समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दे सकते हैं।
पेज 5: अनुमान और कल्पना से
(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हों” सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने निम्नलिखित दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी:
- सामाजिक दृष्टि: जाति, धर्म, और लिंग के आधार पर भेदभाव से मुक्ति।
- आर्थिक दृष्टि: धन और संसाधनों की असमानता से मुक्ति।
- मानसिक दृष्टि: अज्ञानता, अंधविश्वास, और संकीर्ण सोच से मुक्ति।
- राजनीतिक दृष्टि: विदेशी शासन और दबाव से मुक्ति।
- सांस्कृतिक दृष्टि: परंपराओं के बंधनों से मुक्त होकर प्रगतिशील सोच अपनाना।
(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज में पुरुषों की तरह समान अधिकार का…” सुभाषचंद्र बोस को उनके भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कही पड़ी?
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने नारी के लिए समान अधिकारों की बात इसलिए कही क्योंकि वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ कोई भेदभाव न हो। उस समय नारियाँ सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक रूप से पुरुषों से पीछे थीं। बोस का मानना था कि राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब नारी को पुरुषों के समान अवसर और अधिकार मिलें, ताकि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में बराबर का योगदान दे सकें।
(ग) आपके विचार में समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें समान अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर: मेरे विचार में समाज में निम्नलिखित लोगों को समान अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है:
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग: गरीब और वंचित समुदायों को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर मिलने चाहिए।
- दिव्यांगजन: शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम लोगों को समान सुविधाएँ और सम्मान मिलना चाहिए।
- अल्पसंख्यक समुदाय: धार्मिक और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों को बिना भेदभाव के समान अधिकार मिलने चाहिए।
- ग्रामीण क्षेत्रों के लोग: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों को शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी सुविधाओं के समान अवसर मिलने चाहिए।
(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समक्ष युवा को संबोधित करते हुए कहते हैं “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहार स्वरूप देता हूँ- स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस स्वप्न पर आपके (युवा) की क्या प्रतिक्रिया होगी?
उत्तर: एक युवा के रूप में, मैं सुभाषचंद्र बोस के इस स्वप्न को पूरे उत्साह और समर्पण के साथ स्वीकार करूँगा। उनका स्वप्न एक समान, स्वाधीन, और प्रगतिशील समाज का है, जो मुझे प्रेरित करता है कि मैं अपने कार्यों और विचारों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाऊँ। मैं शिक्षा, सामाजिक समानता, और नारी सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में कार्य करके उनके स्वप्न को साकार करने का प्रयास करूँगा।
पेज 6: अभ्यास प्रश्न
(क) अपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इस ‘सपनों के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर: यह शीर्षक इसलिए दिया गया होगा क्योंकि सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में एक आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न की बात की है। यह स्वप्न उनकी प्रेरणा और शक्ति का स्रोत था, और वे चाहते थे कि यह स्वप्न भारतवासियों, विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा बने। ‘सपनों के स्वप्न’ शीर्षक उनके इस उच्च और प्रेरणादायक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर: मैं इस भाषण के अंश को “आदर्श भारत का स्वप्न” नाम दूँगा। मैंने यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि यह भाषण भारत के लिए एक स्वाधीन, समान, और प्रगतिशील समाज के निर्माण की दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह नाम बोस के आदर्शवादी और प्रेरणादायक दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रहेगा?
उत्तर: यदि मुझे अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित विषयों को शामिल करूँगा:
- शिक्षा का महत्व: सभी के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता।
- पर्यावरण संरक्षण: जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता।
- सामाजिक समानता: जाति, लिंग, और आर्थिक भेदभाव को समाप्त करना।
- युवाओं की भूमिका: समाज और राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारी।
शीर्षक: “नए भारत की नींव: युवा और समानता”।
पेज 6: भाषा की बात
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संज्ञा, संबोधन या भाव आदि का बोध करने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढकर दिए गए शब्द समूह को पूरा लिखिए।
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस के भाषण से विशेषता या गुण बताने वाले कुछ शब्द और उनके संदर्भ:
- स्वाधीन (विशेषण): स्वतंत्र, अपने अधीन (उदाहरण: स्वाधीन राष्ट्र)।
- आदर्श (विशेषण): उच्चतम और प्रेरणादायक (उदाहरण: आदर्श समाज)।
- समान (विशेषण): बराबर, भेदरहित (उदाहरण: समान अधिकार)।
- प्रगतिशील (विशेषण): उन्नति की ओर बढ़ने वाला (उदाहरण: प्रगतिशील समाज)।
- कर्मठ (विशेषण): मेहनती, सक्रिय (उदाहरण: कर्मठ व्यक्ति)।
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपयुक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
उत्तर: मैं निम्नलिखित विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखना चाहूँगा:
- स्वाधीन: मैं इसे “जिम्मेदार” विशेषता के साथ रखूँगा, क्योंकि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी आती है।
- आदर्श: मैं इसे “प्रेरणादायक” विशेषता के साथ रखूँगा, क्योंकि आदर्श समाज दूसरों को प्रेरित करता है।
- समान: मैं इसे “निष्पक्ष” विशेषता के साथ रखूँगा, क्योंकि समानता निष्पक्षता पर आधारित होनी चाहिए।
- प्रगतिशील: मैं इसे “नवाचारी” विशेषता के साथ रखूँगा, क्योंकि प्रगति के लिए नवाचार आवश्यक है।
- कर्मठ: मैं इसे “समर्पित” विशेषता के साथ रखूँगा, क्योंकि कर्मठता में समर्पण का भाव होना चाहिए।
कारण: ये विशेषताएँ आधुनिक समाज की जरूरतों को दर्शाती हैं और बोस के स्वप्न को और सशक्त बनाती हैं।
पेज 7: विपरीतार्थी शब्द और उनके प्रयोग
(क) “और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में स्वाधीन का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थी शब्द आप दिए गए हैं, लेकिन वे आपके सामने नहीं हैं। स्वयं विचारकर विपरीतार्थी शब्दों के सही जोड़े बनाएँ।
उत्तर: निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी जोड़े:
- स्वाधीन – पराधीन
- समान – असमान
- उन्नति – अवनति
- कर्मठ – अकर्मण्य
- आदर्श – त्रुटिपूर्ण
(ख) अब सं. 1 और सं. 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाएँ, जैसे- “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”
उत्तर:
- स्वाधीन – पराधीन: राष्ट्र की प्रगति स्वाधीन व्यक्तियों पर निर्भर है, न कि पराधीन मानसिकता वालों पर।
- समान – असमान: समाज में समान अवसरों से विकास होता है, असमान व्यवहार से नहीं।
- उन्नति – अवनति: देश की उन्नति कर्मठता पर निर्भर है, अवनति पर नहीं।
- कर्मठ – अकर्मण्य: समाज का विकास कर्मठ लोगों से होता है, अकर्मण्य लोगों से नहीं।
- आदर्श – त्रुटिपूर्ण: एक आदर्श समाज प्रेरणा देता है, जबकि त्रुटिपूर्ण व्यवस्था निराश करती है।
पेज 7: आपकी बात
(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
उत्तर: मैं अपने विद्यालय, राज्य, और देश के लिए निम्नलिखित स्वप्न देखता हूँ:
- विद्यालय: मेरा विद्यालय ऐसा हो जहाँ प्रत्येक छात्र को समान अवसर मिलें, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो, और नवाचार को प्रोत्साहन मिले।
- राज्य: मेरा राज्य आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध हो, जहाँ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान विकास हो, और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
- देश: मेरा देश एक ऐसा राष्ट्र हो जहाँ जाति, धर्म, और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो, सभी को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर मिलें, और भारत विश्व में शांति और प्रगति का प्रतीक बने।
(ख) हमें बड़ी लड़ाई के बाद स्वतंत्रता मिली थी। अपनी इस स्वतंत्रता का मान स्वयं के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर: अपनी स्वतंत्रता का मान रखने के लिए हम निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
- शिक्षा और जागरूकता: स्वयं को शिक्षित करें और दूसरों को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करें।
- सामाजिक समानता: जाति, धर्म, और लिंग भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएँ।
- पर्यावरण संरक्षण: पर्यावरण को बचाने के लिए वृक्षारोपण और कचरा प्रबंधन जैसे कार्य करें।
- कर्मठता: अपने कार्यों में मेहनत और ईमानदारी से समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दें।
- राष्ट्रीय एकता: विभिन्न समुदायों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा दें।
पेज 8: अभ्यास प्रश्न
(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से सही मिलान कीजिए।
उत्तर:
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | सही मिलान |
|---|---|---|---|
| 1. | 8 अप्रैल, 1929 को चंद्रशेखर आजाद में स्वयं पंचने वाले क्रांतिकारी, शहीद-ए-आजम के नाम से जाने जाते हैं। | 1. सरदार वल्लभभाई पटेल | चंद्रशेखर आजाद |
| 2. | ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु बने। | 2. महात्मा गांधी | चितरंजन दास |
| 3. | जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजनीतिक बंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रांतिकारियों ने 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। अवसर के निःसंदेह दिन जेल में इन्हें देहांत हो गया। | जतिंद्रनाथ दास |
पेज 9: स्त्री सशक्तीकरण
(क) सुभाषचंद्र बोस ने नारियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुमानों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेष अधिकार चाहिए?
उत्तर: सुभाषचंद्र बोस ने नारियों के लिए निम्नलिखित विशेष अधिकारों की बात की होगी:
- शिक्षा का अधिकार: नारियों को पुरुषों के समान शिक्षा प्राप्त करने का अवसर।
- रोजगार का अधिकार: नारियों को सभी क्षेत्रों में समान रोजगार के अवसर।
- राजनीतिक भागीदारी: नारियों को राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदारी।
- सामाजिक सम्मान: सामाजिक भेदभाव से मुक्ति और सम्मानजनक व्यवहार।
- आर्थिक स्वतंत्रता: संपत्ति और संसाधनों पर समान अधिकार।
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ जो गठित किया था, उसमें एक टुकड़ी नारियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।
उत्तर:
- टुकड़ी का नाम: रानी झाँसी रेजिमेंट।
- भूमिका: रानी झाँसी रेजिमेंट आजाद हिंद फौज का एक हिस्सा थी, जिसमें महिलाएँ सैनिक के रूप में प्रशिक्षित थीं। इस टुकड़ी की भूमिका भारत की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष में भाग लेना, युद्ध में सहायता करना, और नारी सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करना था। यह टुकड़ी महिलाओं की साहस और समर्पण की प्रतीक थी।
पेज 9: आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी
(क) आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिव्यक्ति (रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों की कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: मैं सुभाषचंद्र बोस के कार्यों और विचारों से अत्यधिक प्रभावित हूँ।
कारण:
- साहस और नेतृत्व: बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन कर ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया।
- आदर्श समाज की दृष्टि: उन्होंने एक समान, स्वाधीन, और प्रगतिशील समाज की कल्पना की, जिसमें नारी-पुरुष को समान अधिकार मिलें।
- प्रेरणादायक नारे: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा” जैसे नारों से उन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया।
रोल प्ले में चर्चा: मैं कक्षा में बोस के रूप में उनके स्वप्न को प्रस्तुत करूँगा, जिसमें मैं युवाओं को समानता और कर्मठता के लिए प्रेरित करूँगा, और उनके नारे का उपयोग करके स्वतंत्रता और एकता का संदेश दूँगा।
पेज 9: नारा और स्वतंत्रता सेनानी
(ख) नोट लिस्ट 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नोट करें लिस्टन लिखिए, कि वह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
| नारा | स्वतंत्रता सेनानी |
|---|---|
| स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है | बाल गंगाधर तिलक |
| करो या मरो | महात्मा गांधी |
| मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगा | चंद्रशेखर आजाद |
| इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद | भगत सिंह |
| पूर्ण स्वराज | जवाहरलाल नेहरू |
पेज 10: परियोजना कार्य
(क) आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक सांख्यिकीय तंत्र कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संश्लिष्ट तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुनें।
उत्तर: 10 महिला स्वतंत्रता सेनानी:
- रानी लक्ष्मीबाई (उत्तर प्रदेश): झाँसी की रानी ने 1857 के विद्रोह में ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया।
- सावित्रीबाई फुले (महाराष्ट्र): महिलाओं और दलितों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया।
- दुर्गाबाई देशमुख (आंध्र प्रदेश): स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य किया।
- कमला नेहरू (उत्तराखंड): स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और महिलाओं को संगठित किया।
- अरुणा आसफ अली (पंजाब): 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- कस्तूरबा गांधी (गुजरात): अहिंसक आंदोलनों में गांधीजी के साथ सक्रिय रही।
- सरोजिनी नायडू (पश्चिम बंगाल): कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान दिया।
- भिकाजी कामा (महाराष्ट्र): विदेशों में भारतीय स्वतंत्रता का झंडा फहराया।
- उषा मेहता (गुजरात): गुप्त रेडियो स्टेशन चलाकर स्वतंत्रता संग्राम को समर्थन दिया।
- लक्ष्मी सहगल (तमिलनाडु): आजाद हिंद फौज की रानी झाँसी रेजिमेंट की कमांडर थीं।
10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानी:
- महात्मा गांधी (गुजरात): अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया।
- जवाहरलाल नेहरू (उत्तर प्रदेश): स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।
- सुभाषचंद्र बोस (पश्चिम बंगाल): आजाद हिंद फौज के माध्यम से सशस्त्र संघर्ष किया।
- भगत सिंह (पंजाब): क्रांतिकारी गतिविधियों से ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
- चंद्रशेखर आजाद (मध्य प्रदेश): क्रांतिकारी संगठनों का नेतृत्व किया और शहीद हुए।
- लाला लाजपत राय (पंजाब): ‘लाल-बाल-पाल’ तिकड़ी के हिस्से के रूप में स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया।
- बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र): ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया।
- चितरंजन दास (पश्चिम बंगाल): स्वराज पार्टी की स्थापना की और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया।
- राजेंद्र प्रसाद (बिहार): स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय और भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
- सरदार वल्लभभाई पटेल (गुजरात): भारत की एकता के लिए ‘लौह पुरुष’ के रूप में कार्य किया।
नोट: चित्रों का संग्रह करने के लिए पुस्तकालय या इंटरनेट का उपयोग किया जा सकता है, और प्रत्येक चित्र के नीचे उनके योगदान का संक्षिप्त विवरण लिखा जाएगा।