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चतुर्थः पाठः- प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः (यह गोपबन्धु, महान मन वाला देशभक्त, वंदन के योग्य है।)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः

१. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत –

(नीचे लिखे गए प्रश्नों के एक-शब्द में उत्तर लिखो।)

(क) समाज – दिनपत्रिकायाः प्रतिष्ठाता कः?
हिंदी: ‘समाज’ नामक दैनिक समाचार-पत्र की स्थापना किसने की थी?
उत्तरम्: गोपबन्धुः

(ख) गोपबन्धुः कस्मै स्वभोजनं दत्तवान्?
हिंदी: गोपबंधु ने अपना भोजन किसको दिया था?
उत्तरम्: भिक्षुकाय

(ग) मरणासन्नः कः आसीत्?
हिंदी: मृत्यु के निकट कौन था?
उत्तरम्: पुत्रः

(घ) गोपबन्धुः केन उपाधिना सम्मानितः अभवत्?
हिंदी: गोपबंधु को किस उपाधि से सम्मानित किया गया था?
उत्तरम्: उत्कलमणिः

(ङ) गोपबन्धुः कति वर्षाणि कारावासं प्राप्तवान्?
हिंदी: गोपबंधु को कितने वर्षों की जेल हुई थी?
उत्तरम्: द्वौ

२. एकवाक्येन उत्तरं लिखत –

(एक वाक्य में उत्तर लिखो।)

क्रमांकप्रश्न (संस्कृत)प्रश्न (हिंदी)उत्तर (संस्कृत)उत्तर (हिंदी)
कगोपबन्धुः किमर्थम् अश्रुपूर्णनयनः अभवत्?गोपबन्धु की आँखें आँसुओं से क्यों भर गईं?मित्रस्य मरणं ज्ञात्वा गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनः अभवत्।अपने मित्र की मृत्यु जानकर गोपबन्धु की आँखें आँसुओं से भर गईं।
खकीदृशं पुत्रं विहाय गोपबन्धुः समाजसेवाम् अकरोत्?गोपबन्धु ने किस प्रकार के पुत्र को छोड़कर समाजसेवा की?रोगपीडितं पुत्रं विहाय गोपबन्धुः समाजसेवाम् अकरोत्।गोपबन्धु ने रोगग्रस्त पुत्र को छोड़कर समाजसेवा की।
गगोपबन्धोः कृते “उत्कलमणिः” इति उपाधिः किमर्थं प्रदत्ता?गोपबन्धु को “उत्कलमणि” की उपाधि क्यों दी गई?समाजसेवायाम् अग्रणीभावेन कार्यं कृत्वा गोपबन्धोः कृते “उत्कलमणिः” इति उपाधिः प्रदत्ता।समाजसेवा में अग्रणी कार्य करने के कारण गोपबन्धु को “उत्कलमणि” की उपाधि दी गई।
घगोपबन्धुः कुत्र जन्म लब्धवान्?गोपबन्धु ने कहाँ जन्म लिया?गोपबन्धुः ओडिशाराज्ये जन्म लब्धवान्।गोपबन्धु ने ओडिशा राज्य में जन्म लिया।
ङगोपबन्धुः सर्वदा केषाम् उपयोगं कृतवान्?गोपबन्धु ने सदा किसके लिए अपने जीवन का उपयोग किया?गोपबन्धुः सर्वदा जनहिताय स्वजीवनस्य उपयोगं कृतवान्।गोपबन्धु ने सदा जनहित के लिए अपने जीवन का उपयोग किया।

३. कोष्ठके दत्तानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत –

(कोष्ठक में दिए गए शब्दों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए।)

सेवाम् = सेवा (सेवा करना / सेवा)

सुस्वादूनि = स्वादिष्ट (स्वादिष्ट वस्तुएँ / रुचिकर)

सहायताम् = सहायता (मदद)

स्वदेशवस्त्राणि = स्वदेशी वस्त्र (देश में बने कपड़े)

अन्यतमः = किसी एक / उनमें से एक

उत्तरम्:

क्रमांकसंस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
कगोपबन्धुः सेवाम् आरभत।गोपबन्धु ने सेवा शुरू की।
खबालकः मित्राय सहायताम् दत्तवान्।बालक ने मित्र को सहायता दी।
गबालकाः पाठशालायां सुस्वादूनि भक्ष्याणि खादन्ति।बच्चे पाठशाला में स्वादिष्ट भोजन खा रहे हैं।
घरमा स्वदेशे वस्त्राणि दत्तवती।रमा ने अपने देश में वस्त्र दान किए।
ङगोपबन्धुः जनानां मध्ये अन्यतमः प्रतिष्ठितः।गोपबन्धु लोगों में सबसे प्रतिष्ठित था।

४. चित्रं दृष्ट्वा पञ्च वाक्यानि रचयत -

(चित्र देखकर पाँच वाक्य बनाएँ।)

(क) ……………………………………………….

(ख) ……………………………………………….

(ग) ……………………………………………….

(घ) ……………………………………………….

(ङ) ……………………………………………….

उत्तरम्:

इस चित्र को देखकर पाँच वाक्य इस प्रकार बनाए जा सकते हैं:

  1. पुरुषः बालकं चिकित्सालये नयति।
    (पुरुष बच्चे को अस्पताल ले जा रहा है।)
  2. बालकः दुःखितः दृश्यते।
    (बच्चा दुखी दिखाई दे रहा है।)
  3. चिकित्सालयस्य द्वारं खुले अस्ति।
    (अस्पताल का द्वार खुला है।)
  4. पुरुषः बालकं सहानुभूत्याः धारणया समालिङ्गति।
    (पुरुष बच्चे को सहानुभूति से गले लगा रहा है।)
  5. चिकित्सालये स्वास्थ्यम् सेवां प्रदत्तुम् सज्जम् अस्ति।
    (अस्पताल स्वास्थ्य सेवा देने के लिए तैयार है।)

५. समुचितेन पदेन श्लोकं पूरयत –

(उचित शब्द से श्लोक को पूरा कीजिए।)

(क) ————————  मम लीयतां तनुः

(ख) उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो ————————–

(ग) स्वदेशलोकास्तदनु ———————– नु

(घ) स्वराज्यमार्गे यदि ———————,
(ङ)———————-परिपूरितास्तु सा

उत्तरम्:

(क) स्वदेशभूमौ मम लीयतां तनुः
हिंदी: मेरा शरीर स्वदेश की मिट्टी में विलीन हो जाए।

(ख) उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो लोकसेवकः
हिंदी: जिसे उत्कलमणि के नाम से जाना जाने वाला जनसेवक।

(ग) स्वदेशलोकास्तदनु प्रयान्तु नु
हिंदी: देशवासियों को मेरे पीछे चलना चाहिए।

(घ) स्वराज्यमार्गे यदि गर्तमालिका
हिंदी: अगर स्वतंत्रता के मार्ग में गड्ढों की श्रृंखला हो।

(ङ) ममास्थिमांसैः परिपूरितास्तु सा
हिंदी: वे गड्ढे मेरे अस्थि और मांस से भर जाएँ।

६. उदाहरणानुसारं क्रियापदं स्त्रीलिङ्गे परिवर्तयत –

(उदाहरण के अनुसार क्रियापद को स्त्रीलिंग में बदलो।)

(यथा – गतवान् = गतवती)

क्रमांकपुरुषलिङ्ग क्रियापदस्त्रीलिङ्ग रूपहिंदी अर्थ
कगतवान्गतवतीगया/गई है
खप्राप्तवान्प्राप्तवतीप्राप्त किया/की है
गउपविष्टवान्उपविष्टवतीबैठा/बैठी है
घभक्तवान्भक्तवतीभक्त हुआ/हुई है
ङकृतवान्कृतवतीकिया/की है
चगहीतवान्गहीत्वतीपकड़ा/पकड़ी है

७. समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत –

(उचित शब्द के साथ स्तम्भों का मिलान कीजिए।)

उत्तरम्: 

संस्कृत (स्तम्भ अ)संस्कृत (स्तम्भ इ)हिंदी अनुवाद
1. समाजःदिनपत्रिका‘समाज’ एक समाचार-पत्र (अखबार) है।
2. ममास्थिमांसैःपरिपूरितास्तुमेरी हड्डियाँ और मांस से भरे हुए हों।
3. उत्कलमणिःगोपबन्धुः‘उत्कलमणि’ उपाधि गोपबन्धु को दी गई थी।
4. “आँ आँ” इतिक्रन्दनध्वनिः“आँ आँ” एक रोने की ध्वनि है।
5. सुस्वादूनिव्यञ्जनानिस्वादिष्ट चीजें = व्यंजन।

८. घटनाक्रमेण वाक्यानि पुनः लिखत (क्रम से) –

(वाक्यों को घटनाओं के सही क्रम में फिर से लिखो।)

(क) भिक्षुकञ्च तद्भोजितवान्।
हिंदी: उन्होंने भिखारी को भोजन दिया।

(ख) प्रफुल्लचन्द्ररायः गोपबन्धुम् उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्।
हिंदी: प्रफुल्लचंद्र राय ने गोपबंधु को ‘उत्कलमणि’ की उपाधि देकर सम्मानित किया।

(ग) गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्।
हिंदी: गोपबंधु की आँखें आँसुओं से भर गईं।

(घ) अतिथयो हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः।
हिंदी: अतिथियों ने हाथ-पैर धोकर आसनों पर बैठ गए।

(ङ) दिनत्रयात् किमपि न भुक्तम्।
हिंदी: तीन दिन से उन्होंने कुछ भी नहीं खाया।

उत्तरम्: 

(ङ) दिनत्रयात् किमपि न भुक्तम्।

(घ) अतिथयो हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः।

(ग) गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्।

(क) भिक्षुकञ्च तद्भोजितवान्।

(ख) प्रफुल्लचन्द्ररायः गोपबन्धुम् उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्।

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