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एकादशः पाठः- सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) (अनुकूल अवसर पर श्रेष्ठता का त्याग )

अभ्यासात् जायते सिद्धिः

१. निम्नलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयानि स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत – (निम्नलिखित वाक्यों में से लाल रंग के मोटे शब्दों को ध्यान में रखकर प्रश्न बनाइए।)

(क) वीरवरो पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत्। (वीरवर ने पत्नी, पुत्री और पुत्र को जगाया।)

प्रश्न (संस्कृत): कः पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत्? (किसने पत्नी, पुत्री और पुत्र को जगाया?)

(ख) ततस्ते सर्वे सर्वमङ्गलाया आयतनं गताः। (इसके बाद वे सभी सर्वमंगल देवी के मंदिर गए।)

प्रश्न (संस्कृत): ततस्ते सर्वे जनाः कुत्र गताः? (इसके बाद वे सब लोग कहाँ गए?)

(ग) वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं पुत्रोत्सर्गेण अकरोत्। (वीरवर ने अपने कर्तव्य की पूर्ति पुत्र के त्याग से की।)

प्रश्न (संस्कृत): वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं केन अकरोत्? (वीरवर ने किसके त्याग से कर्तव्य की पूर्ति की?)

(घ) राजा स्वप्रासादं प्राविशत्। (राजा अपने महल के भीतर प्रवेश किया।)

प्रश्न (संस्कृत): राजा कुत्र प्राविशत्? (राजा कहाँ प्रवेश किया?)

(ङ) महीपतिः वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् अयच्छत्। (महीपति ने वीरवर को सम्पूर्ण कर्नाट प्रदेश प्रदान किया।)

प्रश्न (संस्कृत): महीपतिः कस्य समग्रकर्णाटप्रदेशं अयच्छत्? (महीपति ने पूरा कर्नाट प्रदेश किसे दिया?)

२. अधोलिखितान् प्रश्नान् उत्तरत – (नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।)

(क) वीरवरः किम् अवर्णयत् ? (वीरवर ने किसका वर्णन किया?)

उत्तरम् – वीरवरः अखिलराजलक्ष्मीसंवादं अवर्णयत्। (वीरवर ने सम्पूर्ण राजलक्ष्मी संवाद का वर्णन किया।)

(ख) प्राज्ञः धनानि जीवितञ्च केभ्यः उत्सृजेत् ? (बुद्धिमान मनुष्य धन और जीवन किसके लिए त्याग करता है?)

उत्तरम् – प्राज्ञः परार्थे धनानि जीवितञ्च उत्सृजेत्। (बुद्धिमान व्यक्ति परोपकार के लिए धन और जीवन का त्याग करता है।)

(ग) केन सदृशः लोके न भूतो न भविष्यति ? (इस संसार में किसके समान न पहले कोई हुआ और न आगे होगा?)

उत्तरम् – वीरवरेण सदृशः लोके न भूतो न भविष्यति। (वीरवर के समान संसार में न पहले कोई था और न आगे होगा।)

(घ) का अदृश्या अभवत्? (कौन अदृश्य हो गई?)

उत्तरम् – भगवती सर्वमङ्गला अदृश्या अभवत्। (देवी सर्वमंगल अदृश्य हो गई।)

(ङ) सपरिवारः वीरवरः कुत्र गतवान्? (वीरवर अपने परिवार सहित कहाँ गया?)

उत्तरम् – सपरिवारः वीरवरः स्वगृहं गतवान्। (वीरवर अपने परिवार सहित अपने घर चला गया।)

३. अधोलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयपदानि केभ्यः प्रयुक्तानि इति उदाहरणानुगुणं लिखत –

(नीचे दिए गए वाक्यों में लाल रंग से दर्शाए गए शब्दों का किसके द्वारा प्रयोग किया गया है, इसे उदाहरण के अनुसार लिखिए।)

(क) भगवति ! न “मे” प्रयोजनं राज्येन जीवितेन वा ।
उत्तरम् – राज्ञः

हिंदी अनुवाद –
हे माता! मुझे न राज्य से और न ही जीवन से कोई प्रयोजन है।
(यहाँ “मे” = मम = मेरा; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)

(ख) वत्स ! अनेन “ते” सत्त्वोत्कर्षेण भृत्यवात्सल्येन च परं प्रीतास्मि ।
उत्तरम् – राज्ञः

हिंदी अनुवाद –
बेटा! तुम्हारी इस श्रेष्ठ शक्ति और सेवकों के प्रति स्नेह से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ।
(यहाँ “ते” = तव = तुम्हारे; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)

(ग) धन्याहं “यस्या” ईदृशो जनको भ्राता च ।
उत्तरम् – वीरवत्या

हिंदी अनुवाद –
मैं भाग्यशाली हूँ, जिसकी ऐसे पिता और भाई हैं।
(यहाँ “यस्या” = जिसकी; प्रयुक्तः = वीरवती, पुत्री के लिए)

(घ) तदेतत्परित्यक्तेन “मम” राज्येनापि किं प्रयोजनम् !
उत्तरम् – राज्ञः

हिंदी अनुवाद –
जब यह सब त्याग दिया है तो मेरे राज्य का भी क्या प्रयोजन है?
(यहाँ “मम” = मेरा; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)

(ङ) “अयम्” अपि सपरिवारो जीवतु ।
उत्तरम् – वीरवरः

हिंदी अनुवाद –
यह राजपुत्र भी अपने परिवार सहित जीवित रहे।
(यहाँ “अयम्” = यह; प्रयुक्तः = वीरवरः)

४. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानि वाक्यानि अन्वयरूपेण लिखत –

(नीचे दिए गए वाक्यों को उदाहरण के अनुसार अन्वय रूप में लिखिए।)

यथा –
कृतो मया गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो स्वपुत्रोत्सर्गेण ।
👉 गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो मया स्वपुत्रोत्सर्गेण कृतः।

(क) नेदानीं राज्यभङ्गस्ते भविष्यति। (अब तुम्हारा राज्य नष्ट नहीं होगा।)

👉 अन्वय: ते राज्यभङ्गः अद्य भविष्यति न। (तुम्हारा राज्य अब नष्ट नहीं होगा।)

(ख) तेन पातितं स्वशिरः स्वकरस्थखड्गेन। (उसने अपने हाथ में धरी तलवार से अपना सिर काट लिया।)

👉 अन्वय: तेन स्वकरस्थखड्गेन स्वशिरः पातितम्। (उसने अपने सिर को अपने हाथ की तलवार से काटा।)

(ग) तदा ममायुःशेषेणापि जीवतु राजपुत्रो वीरवरः सह पुत्रेण पत्न्या दुहित्रा च। (तब मेरे शेष जीवन से भी राजकुमार वीरवर अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री के साथ जीवित रहे।)

👉 अन्वय: तदा राजपुत्रः वीरवरः मम आयुःशेषेणापि सह पुत्रेण पत्न्या च दुहित्रा जीवतु। (तब राजकुमार वीरवर मेरे शेष जीवन से भी अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री सहित जीवित रहे।)

(घ) तत्क्षणादेव देवी गताऽदर्शनम्। (उसी क्षण देवी अदृश्य हो गई।)

👉 अन्वय: देवी तत्क्षणादेव गताऽदर्शनम्। (देवी उसी क्षण अदृश्य हो गई।)

(ङ) महीपतिस्तस्मै प्रायच्छत् समग्रकर्णाटप्रदेशं राजपुत्राय वीरवराय। (राजा ने राजकुमार वीरवर को पूरा कर्नाट प्रदेश प्रदान किया।)

👉 अन्वय: महीपतिः तस्मै राजपुत्राय वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् प्रायच्छत्। (राजा ने राजकुमार वीरवर को सम्पूर्ण कर्नाट प्रदेश दिया।)

(च) जायन्ते च म्रियन्ते च मादृशाः क्षुद्रजन्तवः। (मेरे जैसे छोटे जीव जन्म लेते और मृत्यु को प्राप्त होते हैं।)

👉 अन्वय: मादृशाः क्षुद्रजन्तवः जायन्ते च म्रियन्ते च। (मेरे जैसे छोटे जीव जन्म लेते हैं और मरते भी हैं।)

५. उदाहरणानुगुणम् अधोलिखितानां पदानां पदच्छेदं कुरुत –

(नीचे दिए गए शब्दों का पद-विभाजन (शब्दों को अलग-अलग करके) उदाहरण के अनुसार कीजिए।)

यथा –
यद्येवमस्मत्कुलोचितम् = यदि-एवम्-अस्मत्-कुलोचितम्
सत्त्वोत्कर्षेण = सत्त्व–उत्कर्षेण

(क) गृहीतस्वामिवर्तनस्य = गृहीत-स्वामि-वर्तनस्य
हिंदी अनुवाद: स्वामी द्वारा दिया गया वेतन

(ख) निस्तारोपायः = निस्तार-उपायः
हिंदी अनुवाद: मुक्ति पाने का उपाय

(ग) गृह्यतामेष = गृह्यताम्-एष
हिंदी अनुवाद: इसे स्वीकार करो

(घ) स्वपुत्रोत्सर्गेण = स्व-पुत्र-उत्सर्गेण
हिंदी अनुवाद: अपने पुत्र के बलिदान से

(ङ) स्वकरस्थखड्गेन = स्व-कर-स्थ-खड्गेन
हिंदी अनुवाद: अपने हाथ में रखी तलवार से

(च) तदेतत्परित्यक्तेन = तत्-एतत्-परित्यक्तेन
हिंदी अनुवाद: इस सबको त्यागने वाले के द्वारा

(छ) स्वशिरश्छेदनार्थमुत्क्षिप्तः = स्व-शिरः-छेदन-अर्थम्-उत्क्षिप्तः
हिंदी अनुवाद: अपना सिर काटने के लिए उठाया गया

(ज) मद्दर्शनाददृश्यताम् = मत्-दर्शनात्-दृश्यताम्
हिंदी अनुवाद: मेरे दर्शन से अदृश्य हो जाना

(झ) तत्क्षणादेव = तत्-क्षणात्-एव
हिंदी अनुवाद: उसी समय तुरंत

(ञ) लब्धजीवितः = लब्ध-जीवितः
हिंदी अनुवाद: जिसे जीवन प्राप्त हुआ

६. (क) उदाहरणानुसार पाठगत पदों से रिक्त स्थानों की पूर्ति सन्धियुक्त शब्दों द्वारा करें –

संधिसन्धियुक्त शब्दहिंदी अर्थ
तत् + श्रुत्वातच्छ्रुत्वाउसे सुन लेने पर
दुहितरम् + चदुहितरञ्चपुत्री भी
धन्यः + अहम्धन्याहम्मैं सचमुच धन्य हूँ
जीवितम् + च + एवजीवितमेवकेवल जीवन ही
विलम्बः + तातविलम्बस्तातदेर क्यों कर रहे हो, पिताजी?
कः + अधुनाकोऽधुनाअब कौन है?
न + आचरितव्यम्नाचरितव्यम्जिसका आचरण नहीं होना चाहिए
धन्या + अहम्धन्याहम्मैं भाग्यशाली हूँ
निस्तारः + उपायःनिस्तारोपायःछुटकारा पाने का उपाय
वीरवरः + अवदत्वीरवरोऽवदत्वीरवर ने कहा
ततः + असौततोऽसौतब वह व्यक्ति
ततः + तेततस्तेतब वे सब

(ख) निम्नलिखितपदानां सन्धिच्छेदं कुरुत – (नीचे दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद कीजिए।)

शूद्रकोऽपि
➤ शूद्रकः + अपि  (शूद्रक भी था)

पुनर्भूपालेन
➤ पुनः + भूपालेन  (फिर राजा द्वारा)

महीपतिस्तस्मै
➤ महीपतिः + तस्मै  (राजा ने उसी को)

प्रायच्छत्
➤ प्रा + अयच्छत्  (प्रदान किया / सौंपा)

नृपतिरपि
➤ नृपतिः + अपि  (राजा भी)

सर्वेषामदृश्य
➤ सर्वेषाम् + अदृश्य  (सभी के लिए अदृश्य)

वार्ताऽन्या
➤ वार्ता + अन्या  (कोई दूसरी सूचना / समाचार)

राज्यभङ्गस्ते
➤ राज्यभङ्गः + ते   (तेरा राज्य नष्ट नहीं होगा)

गतिर्गन्तव्या
➤ गतिः + गन्तव्या  (गति प्राप्त की जानी चाहिए)

इत्युक्त्वा
➤ इति + उक्त्वा  (ऐसा कहकर)

नेदानीं
➤ न + इदानीं  (अब नहीं)

प्रीतास्मि
➤ प्रीता + अस्मि  (मैं प्रसन्न हूँ)

७. अधोलिखितानि कथनानि कथायाः घटनानुसारं लिखत – (नीचे दिए गए कथनों को कहानी की घटनाओं के क्रम में लिखिए।)

(क) सर्वं दृष्ट्वा राजा शद्रकः अ ू पि सर्वस्वसमर्पणार्थं सिद्धः अभवत्। (ख) पितः वा ु र्तां श्त रु्वा शक्तिधरः प्रसन्नतया स्वस्‍य समर्पणार्थं सिद्धः अभवत्। (ग) प्रातः राजा वीरवरम अप ् च्छत ृ ‘ ् ह्यः रात्रौ किम अभवत ् ’? ् (घ) वीरवरो गहृ गत ं ्वा पत्नीं पत्ुरं पत्ुरीञ्च प्राबोधयत, स् र्वां च वार्ताम अक ् थयत्। (ङ) वीरवरेण उक्तम – स ् ्वामिन्! न कापि वार्ता  । सा नारी अदृश्या अभवत्। (च) भगवती प्रसन्ना अभवत्। भगवत्याः कृपया सर्वे जीवितवन्तः । (छ) वीरवरः परिवारेण सह सर्वस्वसमर्पणम अकरोत ् ्।

उत्तरम्-

(घ) वीरवरो गृहं गत्वा पत्नीं पुत्रं पुत्रीञ्च प्राबोधयत्, सर्वां च वार्ताम् अकथयत्।

हिंदी – वीरवर घर जाकर अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाता है और पूरा समाचार सुनाता है।

(ख) पितुः वार्तां श्रुत्वा शक्तिधरः प्रसन्नतया स्वस्य समर्पणार्थं सिद्धः अभवत्।
हिंदी – पिता की बात सुनकर शक्तिधर हर्षपूर्वक स्वयं को समर्पित करने के लिए तैयार हो गया।

(छ) वीरवरः परिवारेण सह सर्वस्वसमर्पणम् अकरोत्।
हिंदी – वीरवर ने अपने परिवार सहित सब कुछ अर्पित कर दिया।

(क) सर्वं दृष्ट्वा राजा शूद्रकः अपि सर्वस्वसमर्पणार्थं सिद्धः अभवत्।
हिंदी – यह सब देखकर राजा शूद्रक भी पूर्ण समर्पण के लिए प्रस्तुत हो गया।

(च) भगवती प्रसन्ना अभवत्। भगवत्याः कृपया सर्वे जीवितवन्तः।
हिंदी – भगवती प्रसन्न हुई और उनकी कृपा से सब जीवित रहे।

(ग) प्रातः राजा वीरवरम् अपृच्छत् ‘ह्यः रात्रौ किम् अभवत्’?
हिंदी – सुबह राजा ने वीरवर से पूछा – “बीती रात क्या हुआ था?”

(ङ) वीरवरेण उक्तम् – स्वामिन् ! न कापि वार्ता । सा नारी अदृश्या अभवत्।
हिंदी – वीरवर ने उत्तर दिया – “स्वामी! कोई विशेष घटना नहीं हुई, वह स्त्री अदृश्य हो गई।”


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