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सप्तमः पाठः- मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा सुंदर (मनोहारी भाषा की सुंदर मणि-मण्डली)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां एकपदेन उत्तरं लिखत। (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दें।) (क) सुन्दरसुरभाषा कस्य वचनातीता ?हिंदी: सुंदर और सुगंधित भाषा किसकी वाणी से परे है?उत्तरम् – पोषणक्षमतायाः (पालन-पोषण की क्षमता से) (ख) संस्कृतभाषा कुत्र विजयते ?हिंदी: संस्कृत भाषा कहाँ प्रभावी होती है?उत्तरम् – धरायाम् (पृथ्वी पर) (ग) संस्कृतभाषा कस्य आशा ?हिंदी: संस्कृत भाषा किसकी आशा है?उत्तरम् … Read more

षष्ठः पाठः- डिजिभारतम् – युगपरिवर्तनम (डिजिटल भारत – युग परिवर्तन)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत – (पाठ के आधार पर नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो।) (क) प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये कीदृशी प्रौद्योगिकी प्रयुक्ता अस्ति?हिंदी: प्रधानमंत्री संग्रहालय में किस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया गया है?उत्तरम् – अद्यतनप्रौद्योगिकीः (अत्याधुनिक तकनीक) (ख) हॉलोग्राम्-द्वारा कस्य भाषणं दृश्यते?हिंदी: होलोग्राम के माध्यम से किसका भाषण … Read more

पञ्चमः पाठः- गीता सुगीता कर्तव्या (गीता और सुगीता का पालन करना आवश्यक है)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत – (नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो।) (क) श्रद्धावान् जनः किं लभते?हिंदी: श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति क्या प्राप्त करता है?उत्तरम्: ज्ञानम् (ज्ञान) (ख) कस्मात् सम्मोहः जायते?हिंदी: मोह (भ्रम) किससे उत्पन्न होता है?उत्तरम्: क्रोधात् (क्रोध से) (ग) सम्मोहात् किं जायते?हिंदी: भ्रम (मोह) से क्या उत्पन्न होता है?उत्तरम्: स्मृतिविभ्रमः (स्मृति का भ्रम) (घ) अर्जुनाय … Read more

चतुर्थः पाठः- प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः (यह गोपबन्धु, महान मन वाला देशभक्त, वंदन के योग्य है।)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत – (नीचे लिखे गए प्रश्नों के एक-शब्द में उत्तर लिखो।) (क) समाज – दिनपत्रिकायाः प्रतिष्ठाता कः?हिंदी: ‘समाज’ नामक दैनिक समाचार-पत्र की स्थापना किसने की थी?उत्तरम्: गोपबन्धुः (ख) गोपबन्धुः कस्मै स्वभोजनं दत्तवान्?हिंदी: गोपबंधु ने अपना भोजन किसको दिया था?उत्तरम्: भिक्षुकाय (ग) मरणासन्नः कः आसीत्?हिंदी: मृत्यु के निकट कौन था?उत्तरम्: पुत्रः (घ) गोपबन्धुः केन उपाधिना … Read more

ततीयः पाठः- सुभाषितस्सं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु  (सुंदर वचनों (सुभाषितों) का सेवन करके अपना जीवन सफल बनाओ।)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत –(पाठ के आधार पर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखें) (क) गीतानि के गायन्ति ? (गीत कौन गाते हैं?)उत्तर: देवाः (देवता गीत गाते हैं।) (ख) कः बलं न वेत्ति ? (कौन बल को नहीं जानता?)उत्तर: मषूकः (मच्छर बल को नहीं जानता।) (ग) कः … Read more

द्वितीयः पाठः- अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका (छोटी-छोटी वस्तुओं की एकता भी कार्य को सिद्ध करती है)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत. (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए।) (क) मित्राणि ग्रीष्मावकाशे कुत्र गच्छन्ति? (ग्रीष्मावकाश में मित्र कहाँ जाते हैं?) उत्तरम्: ग्रामम्। (गाँव) (ख) सर्वत्र कः प्रसृतः? (हर जगह कौन फैला हुआ है?) उत्तरम्: वृक्षः। (वृक्ष) (ग) कः सर्वान् प्रेरयन् अवदत्?(सबको प्रेरित करके किसने कहा?) उत्तरम्: शिक्षकः। (शिक्षक) (घ) कः … Read more

प्रथमः पाठः – संगच्छध्वं संवदध्वम्  (एक साथ मिलें और बात करें)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः १. संज्ञानसूक्तं सस्वरं पठत स्मरत लिखत च । (संज्ञासूक्त को जोर से पढ़ें, याद करें और लिखें। ) २. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत- (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूरे वाक्यों में लिखें:) (क) सर्वेषां मनः कीदृशं भवेत् ? (हर किसी का मन कैसा होना चाहिए?) उत्तरम् :  सर्वेषां मनः सामञ्जस्ययुक्तं सौहार्दपूर्णं च भवेत्। (सभी … Read more

अध्याय 10-तरूण के स्वप्न- नोट्स: प्रश्न-उत्तर रूप में

अभ्यास के अंतिम प्रश्नों के उत्तर (हिन्दी में) पेज 5: पक्तियों पर चर्चा (क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।” उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि सुभाषचंद्र बोस एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ धन और संसाधनों का असमान वितरण न हो। प्रत्येक व्यक्ति को आर्थिक रूप से समान अवसर … Read more

अध्याय 9-नोट्स: प्रश्न-उत्तर रूप में

अभ्यास के अंतिम प्रश्नों के उत्तर (हिन्दी में) पेज 5: सोच-विचार के लिए (क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों में स्वयं को सीमाओं में बांधता चला जाता है? उत्तर: कविता के अनुसार, मानव अपनी नकारात्मक प्रवृत्तियों जैसे ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, और घृणा में उलझकर स्वयं को सीमाओं में बांधता चला जाता है। वह अपनी … Read more

अध्याय 8-नए मेहमान: नोट्स प्रश्न-उत्तर रूप में

अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (केवल हिंदी में) पेज 13: मेरी समझ से प्रश्न (क): निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के समक्ष तारा (★) बनाएँ। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर सही हो सकते हैं। प्रश्न (ख): अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?उत्तर: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने: … Read more

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